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बुजुर्ग की हत्या में आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 18 Jun 2015 01:58 AM IST
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इलाहाबाद। गेहूं काटने के मामूली विवाद में बुजुर्ग की गोलीमार कर हत्या कर देने की घटना में अदालत ने अभियुक्त माशूक उर्फ भैय्यन को उम्रकैद तथा दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा का आदेश विशेष न्यायाधीश एससीएसटी महताब अहमद ने दिया। एडीजीसी डीएस मिश्र और बलराम पांडेय ने अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किया।
अभियोजन के अनुसार नवाबगंज के मुबारक पुर गांव निवासी इश्तियाक अहमद उसका भाई नफीस अहमद, इमरान और पिता अयूब 20 अप्रैल 2004 को सुबह मुबारक गांव के कछार में अपने खेत में गेहूं काट रहे थे। इन्हीं के परिवार के माशूक ने इस पर आपत्ति की। उसने गेहूं काटने से मना किया और धमकी दी कि अगर गेहूं काटना बंद नहीं किया तो गोली मार दूंगा। इस बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। माशूक ने तमंचा निकाल लिया। तमंचा देखकर इश्तियाक और उसके भाई भागने लगे। पिता अयूब उम्र अधिक होने के कारण भाग नहीं सके।
माशूक ने उनको गोली मार दी। आयूब ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया। वादी पक्ष का कहना है कि उनके चाचा नईमुद्दीन नि:संतान थे। उनके हिस्से की जमीन के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में रंजिश थी। पुलिस ने माशूक के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया था। साक्ष्यों और गवाहों के बयान से उस पर हत्या का आरोप साबित हो गया। अदालत ने उसे उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने के अलावा अवैध शस्त्र रखने के जुर्म में एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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अभियोजन के अनुसार नवाबगंज के मुबारक पुर गांव निवासी इश्तियाक अहमद उसका भाई नफीस अहमद, इमरान और पिता अयूब 20 अप्रैल 2004 को सुबह मुबारक गांव के कछार में अपने खेत में गेहूं काट रहे थे। इन्हीं के परिवार के माशूक ने इस पर आपत्ति की। उसने गेहूं काटने से मना किया और धमकी दी कि अगर गेहूं काटना बंद नहीं किया तो गोली मार दूंगा। इस बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। माशूक ने तमंचा निकाल लिया। तमंचा देखकर इश्तियाक और उसके भाई भागने लगे। पिता अयूब उम्र अधिक होने के कारण भाग नहीं सके।
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माशूक ने उनको गोली मार दी। आयूब ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया। वादी पक्ष का कहना है कि उनके चाचा नईमुद्दीन नि:संतान थे। उनके हिस्से की जमीन के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में रंजिश थी। पुलिस ने माशूक के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया था। साक्ष्यों और गवाहों के बयान से उस पर हत्या का आरोप साबित हो गया। अदालत ने उसे उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने के अलावा अवैध शस्त्र रखने के जुर्म में एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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