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सर्व समावेशी संस्कृति कुंभ में शामिल हुए स्वामी चिदानंद, कहा- भारत एक बाजार नहीं, भारत एक परिवार है

Thu, 31 Jan 2019 06:37 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Thu, 31 Jan 2019 06:37 PM IST
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kumbh 2019: Swami Chinanand praised the government, said governmental government

एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सर्व समावेशी संस्कृति कुंभ में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सहभाग किया। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद ने कहा कि यह सर्वसामवेशी संस्कृति कुंभ है।

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सच माने तो कुंभ में यह एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है लेकिन हमारे देश की, हमारे राष्ट्र की यही तो पहचान है। दिव्य और भव्य कुंभ से इस सोच का ही विस्तार हो यही है संगम यही है अमृत। यह सोच हमें अपने ऋषियों ने दी थी।
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ऋषियों ने स्वयं पत्ते खाकर हमें जीवन का पता बताया तथा जीवन में अपनी सोच को परिशोधित करने का मौका दिया। उन्होंने अपने लिए नहीं बल्कि अपनो के लिए जीने का संदेश दिया और उन अपनों में वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति, विश्व एक परिवार की संस्कृति समाहित है, इसका संदेश दिया। भारत एक बाजार नहीं, भारत एक परिवार है। कहा कि संगम के तट पर संकल्प कराया कि पानी है तो प्रयाग है इसलिये आईए पानी के लिए अपनी जवानी को लगाए।
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अमृत कुम्भ के अवसर पर अमृत मंथन का यह कुंभ हमें आत्ममंथन की ओर ले जाएं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भैय्या जी जोशी जी द्वारा की गई भारतीय संस्कृति के दिव्य मंत्र एकं सद्विप्रा: बहुधा वदंति की दिव्य व्याख्या को सुनकर सबका मन भाव विभोर हो उठा। अन्य महापुरुषों द्वारा दिए उद्बोधनों और मंत्रों की अद्भुत व्याख्या कर सभी का दिव्य मार्गदर्शन किया। यह कार्यक्रम गंगा पंडाल, परेड क्षेत्र कुंभ मेला में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एवं प्रायोजक उत्तर प्रदेश सरकार, प्रयागराज मेला प्राधिकरण संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार आयोजित किया गया।


भारत के सभी मत, पंथ, संप्रदाय एवं आध्यात्मिक विचारधाराओं के धर्माचार्य एक मंच पर एकत्रित होकर एक सद्विप्रा बहुधा वंदति, एक ही सत्य के अनेक रूपों में वर्णन का पुन: उद्घोष कर न केवल भारत अपितु संपूर्ण विश्व के लिये शांति, सद्भाव एवं समृद्धि का उद्घोष किया जा सके।

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