{"_id":"5f1ad2488ebc3e63d415a3b2","slug":"kovid-patient-wait-for-plajma-thirepy42","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से उपचार के लिए करना होगा इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी से उपचार के लिए करना होगा इंतजार
Fri, 24 Jul 2020 07:22 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 07:22 PM IST
विज्ञापन
Plasma Therapy
- फोटो : पेक्सेल्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के लखनऊ, नोएडा, आगरा जैसे बड़े शहरों में प्लाजमा थेरेपी से कोविड-19 मरीजों के उपचार का ट्रायल भले ही शुरू हो गया हो लेकिन प्रयागराज अभी से अछूता है। हालांकि, क्लीनिकल ट्रॉयल शुरू करने के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्लाज्मफरेसिस मशीन की मांग शासन से की है।
मशीन के आने के बाद इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो सके उसके लिए आईसीएमआर सहित कई सरकारी एजेंसियों से स्वीकृति ली जाएगी। आईसीएमआर के निर्देश के बाद देश के एम्स सहित कई बड़े चिकित्सकीय संस्थानों में कोविड-19 मरीजो के उपचार में क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गए। क्लीनिकल ट्रायल में बहुत से मरीजों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी लखनऊ, नोएडा, आगरा सहित प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में इस थिरेपी की शुरुआत की है।
कानपुर में भी इसकी शुरुआत होने वाली है। वहां भी प्लाज्मफरेसिस मशीन आ गई है और मशीन के ट्रायल के लिए डोनर से प्लाज्मा लिए गए है लेकिन अभी इलाहाबाद सहित प्रदेश के और मेडिकल कॉलेजों में इसका ट्रॉयल भी नही शुरु हो सका है। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों से प्रस्ताव मांगे गए थे।
विज्ञापन
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव बनाकर प्राचार्य के जरिए शासन को भेजा गया है और प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने के लिए प्लाज्मफरेसिस मशीन की मांग की गई। हालांकि, अभी शासन की ओर से कोई स्वीकृति नहीं नहीं मिली है। पैथोलॉजी विभाग की एचओडी प्रोफेसर वत्सला मिश्रा ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
इस मामले में काम आगे बढ़ाने के लिए शासन के निर्णय का इंतजार है। मशीन मिलने के बाद ही बाकी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसमें आईसीएमआर की परमिशन भी लेनी होगी। उसके बाद ही क्लीनिकल ट्रायल किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्लाज्मफरेसिस मशीन से डोनर के शरीर से व्होल ब्लड लेने की बजाए केवल प्लाज्मा ही कलेक्ट किया जा सकेगा। आरबीसी सहित रक्त के अन्य चीजों के लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक डोनर से दो-तीन कोरोना पॉजिटिव लोगों का उपचार हो सकेगा।
यह एक जटिल प्रक्रिया है। केवल उन्हीं लोगो के शरीर से प्लाज्मा लिया जा सकेगा जो पूरी तरह से ठीक हो गए हैं और जिनके जिनमें एंटीबॉडी बन चुकी है। ऐसे लोगों के से प्लाज्मा नहीं लिया जा सकता है, जिनके शरीर में बीपी, शुगर सहित अन्य बीमारियों हों। उन्होंने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने एक स्ट्रिक्ट गाइडलाइन बनाई है।
क्लिनिकल ट्रायल के भी रिजल्ट अभी हंड्रेड परसेंट तक नहीं पहुंचे हैं। जिन लोगों को यह थैरेपी दी गई है, उनमें बहुतो में कमप्लीकेशन भी सामने आए हैं। इसी वजह से यह अभी कितना सफल होगा इस पर अभी कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा रहा है। उधर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एस पी सिंह ने कहा कि प्लाज्मफेरेसिस मशीन के आने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
मशीन के आने के बाद इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो सके उसके लिए आईसीएमआर सहित कई सरकारी एजेंसियों से स्वीकृति ली जाएगी। आईसीएमआर के निर्देश के बाद देश के एम्स सहित कई बड़े चिकित्सकीय संस्थानों में कोविड-19 मरीजो के उपचार में क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गए। क्लीनिकल ट्रायल में बहुत से मरीजों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी लखनऊ, नोएडा, आगरा सहित प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में इस थिरेपी की शुरुआत की है।
विज्ञापन
कानपुर में भी इसकी शुरुआत होने वाली है। वहां भी प्लाज्मफरेसिस मशीन आ गई है और मशीन के ट्रायल के लिए डोनर से प्लाज्मा लिए गए है लेकिन अभी इलाहाबाद सहित प्रदेश के और मेडिकल कॉलेजों में इसका ट्रॉयल भी नही शुरु हो सका है। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों से प्रस्ताव मांगे गए थे।
विज्ञापन
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव बनाकर प्राचार्य के जरिए शासन को भेजा गया है और प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने के लिए प्लाज्मफरेसिस मशीन की मांग की गई। हालांकि, अभी शासन की ओर से कोई स्वीकृति नहीं नहीं मिली है। पैथोलॉजी विभाग की एचओडी प्रोफेसर वत्सला मिश्रा ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
इस मामले में काम आगे बढ़ाने के लिए शासन के निर्णय का इंतजार है। मशीन मिलने के बाद ही बाकी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसमें आईसीएमआर की परमिशन भी लेनी होगी। उसके बाद ही क्लीनिकल ट्रायल किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्लाज्मफरेसिस मशीन से डोनर के शरीर से व्होल ब्लड लेने की बजाए केवल प्लाज्मा ही कलेक्ट किया जा सकेगा। आरबीसी सहित रक्त के अन्य चीजों के लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक डोनर से दो-तीन कोरोना पॉजिटिव लोगों का उपचार हो सकेगा।
यह एक जटिल प्रक्रिया है। केवल उन्हीं लोगो के शरीर से प्लाज्मा लिया जा सकेगा जो पूरी तरह से ठीक हो गए हैं और जिनके जिनमें एंटीबॉडी बन चुकी है। ऐसे लोगों के से प्लाज्मा नहीं लिया जा सकता है, जिनके शरीर में बीपी, शुगर सहित अन्य बीमारियों हों। उन्होंने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने एक स्ट्रिक्ट गाइडलाइन बनाई है।
क्लिनिकल ट्रायल के भी रिजल्ट अभी हंड्रेड परसेंट तक नहीं पहुंचे हैं। जिन लोगों को यह थैरेपी दी गई है, उनमें बहुतो में कमप्लीकेशन भी सामने आए हैं। इसी वजह से यह अभी कितना सफल होगा इस पर अभी कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा रहा है। उधर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ एस पी सिंह ने कहा कि प्लाज्मफेरेसिस मशीन के आने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।