Population Policy : भविष्य को ध्यान में रखते हुए हो जनसंख्या नीति का निर्धारण, संघ की बैठक में चर्चा
Population Policy : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में मंगलवार को जनसंख्या असंतुलन के मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई।
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में मंगलवार को जनसंख्या असंतुलन के मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में कहा गया कि जनसंख्या नियंत्रण व धर्म के आधार पर जनसंख्या असंतुलन को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पदाधिकारियों ने इसके लिए एक लंबी नीति बनाने की वकालत की। यह भी विमर्श हुआ कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या नीति का निर्धारण किया जाए।
प्रयागराज के गौहनियां स्थित वात्सल्य सभागार में हुई बैठक में पांच अक्तूबर को नागपुर में संघ प्रमुख के जनसंख्या असंतुलन मुद्दे पर दिए गए वक्तव्य पर पदाधिकारियों ने मंथन किया। इस दौरान संघ द्वारा पूर्व में जनसंख्या के मुद्दे पर पारित किए गए प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। जनसंख्या असंतुलन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष 2004 एवं 2015 में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। फिलहाल बैठक में तमाम राज्यों में घट रही हिंदू आबादी पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों का इस बात पर भी जोर रहा कि धर्म आधारित जनसंख्या संतुलन एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अगर जनसंख्या बढ़ती रही तो लोगों को किस तरह की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी, यह सब एक गंभीर विषय है। इसके लिए जरूरी है कि देश में उपलब्ध संसाधनों, भविष्य की जरूरतों और जन सांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को देखते हुए एक ठोस नीति पर काम हो। धमांर्तरण भी रुकना जरूरी है। एनआरसी और घुसपैठ की जांच पर प्रभावी कानून बनाने की जरूरत पर भी संघ पदाधिकारियों का जोर रहा।
बंगाल के कई जिलों में हिंदू हो गए अल्पसंख्यक
विभिन्न राज्यों में घट रही हिंदू आबादी पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ की वजह से असम और बंगाल के कुछ जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के सात अन्य जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक होने की कगार पर हैं। देश के सीमावर्ती प्रदेशों, असम, पश्चिमी बंगाल एवं बिहार के सीमावर्ती जिलोंं में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
ज्वाइन आरएसएस के तहत बालकों-युवाओं पर नजर
टूटते पारिवारिक तानाबाने से चिंतित संघ का बालकों एवं युवाओं को जोड़ने पर अधिक जोर है। संस्कार शालाओं के माध्यम से उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर कार्य चल रहा है। इसी क्रम मेें ज्वाइन आरएसएस (ऑनलाइन) एप पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने और संघ के बारे में जानकारी दिए जाने पर मंथन हुआ। संघ ने 2024 तक सभी मंडलों और एक लाख स्थानों तक कार्य पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
मंदिर, जल, दाह संस्कार का अधिकार सभी के लिए हो
सामाजिक भेदभाव से चिंतित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुरीतियों को दूर भगाने के लिए व्यापक अभियान चलाने जा रहा है। मंदिर, जल, दाह संस्कार का अधिकार सभी के लिए हो, इसका मूल मंत्र होगा। इसके लिए बस्तियों तथा उपेक्षित लोगों के बीच जाकर सेवा कार्यों को विस्तार देने की भी योजना बनाई गई है।
गौहनिया स्थित एक स्कूल में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में तीसरे दिन मंगलवार को सामाजिक समरसता पर मंथन हुआ। अनुसूचित जाति पर बढ़ते उत्पीड़न की शिकायतों के परिपेक्ष में सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा था, ‘मंदिर, जल, दाह संस्कार’ सभी के लिए समान होना चाहिए।
हमें इस बात के लिए लड़ना बंद करना होगा कि कौन शादियों में घुड़सवारी करेगा और कौन नहीं।’ उन्हांेने कहा था, भारतीय संविधान राजनीतिक और आर्थिक समानता पर केंद्रित है लेकिन सामाजिक समानता के बिना, वास्तविक और स्थिर परिवर्तन संभव नहीं है।
बैठक में सरसंघ चालक के इस बयान तथा इसके निहितार्थ पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में बस्तियों तथा सामाजिक तौर पर उपेक्षित लोगों के बीच जाकर सेवा कार्यों को विस्तार दिए जाने पर चर्चा हुई। शिक्षा और स्वास्थ्य इनकी मूल समस्या है। ऐसे में सेवा कार्यों के माध्यम से इनसे जुड़ी गतिविधियों को गति देने की बात कही गई। संघ के पदाधिकारियों का यह भी कहना था कि दूसरे वर्ग के लोग हिंदुओं को बरगलाते हैं कि उनका कोई सम्मान नहीं है।