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High Court : नाबालिग को बालगृह में रखना अवैध हिरासत नहीं, बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका खारिज

Fri, 24 Apr 2026 02:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 Apr 2026 02:23 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के आदेश पर नाबालिग को बालगृह में रखना अवैध हिरासत नहीं मानी जा सकती।

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Keeping a minor in a children's home is not illegal detention, habeas corpus petition dismissed
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के आदेश पर नाबालिग को बालगृह में रखना अवैध हिरासत नहीं मानी जा सकती। ऐसे मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने मांग की थी कि उसकी पत्नी को इच्छा के विरुद्ध वृंदावन स्थित राजकीय बालिका गृह में रखा गया है और उसे उसकी कस्टडी दी जाए।

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वहीं, राज्य की ओर से दलील दी गई कि याची के खिलाफ नाबालिग से विवाह करने का आपराधिक मामला लंबित है। अदालत को बताया गया कि नाबालिग को 18 दिसंबर 2025 को संभल के सीडब्ल्यूसी के आदेश से बालगृह भेजा गया था, जो किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत पारित न्यायिक आदेश है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक आदेश के तहत हुई हिरासत को हैबियस कॉर्पस से चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में उचित उपाय अपील या पुनरीक्षण है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। 

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