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अबकी कल्पवास को आएंगे किन्नर
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 28 Nov 2016 01:50 AM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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अबकी माघ मेले में किन्नर अखाड़ा श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहेगा। उज्जैन महाकुंभ में बने किन्नर अखाड़े के मुखिया अपने पदाधिकारियों, सदस्यों के साथ संगम की रेती पर पहली बार कल्पवास और संगम में डुबकी लगाने के लिए आएंगे। सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो पौष पूर्णिमा पर पहली डुबकी के साथ कल्पवास का संकल्प लिया जाएगा। इस दौरान उनके शिविरों में धार्मिक अनुष्ठान के अतिरिक्त अन्य विविध धार्मिक, सामाजिक विषयों पर मंथन भी किया जाएगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में अखाड़े के मुखिया महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने कहा, फिलहाल माघ पर्यंत संगमतट पर कल्पवास हमारी प्राथमिकता है। इस दौरान त्रिवेणी स्नान, पूजन के अतिरिक्त विविध अनुष्ठान होंगे। अखाड़े के संरक्षक ऋषि अजयदास की देखरेख में सभी सदस्य स्नान पर्वों पर खास अंदाज में डुबकी लगाएंगे। शिविर के लिए तैयारियां की जा रही हैं। माघ मेला क्षेत्र में अखाड़े के शिविर के लिए भूमि आवंटित किए जाने को लेकर माघ मेला प्रशासन के पास शीघ्र ही आवेदन किया जाएगा।
किन्नर अखाड़ा माघ मेले के दौरान शासन-प्रशासन से प्रयाग अर्द्धकुंभ में अखाड़े के लिए जमीन के बारे में भी मांगपत्र सौंपेगा। हालांकि अब तक अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन की ओर से किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं दी गई है। वैसे अखाड़े की मान्यता के सवाल पर मुखिया महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने कहा, इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, किन्नरों को तो प्राकृतिक रूप से मान्यता मिली हुई है। बता दें, किन्नरों की ओर से स्वयंभू अखाड़ा बनाए जाने को लेकर अखाड़ा परिषद भी खासा नाराज है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि 13 अखाड़ों के अतिरिक्त किसी अन्य को न तो मान्यता है और न ही दी जाएगी।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में अखाड़े के मुखिया महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने कहा, फिलहाल माघ पर्यंत संगमतट पर कल्पवास हमारी प्राथमिकता है। इस दौरान त्रिवेणी स्नान, पूजन के अतिरिक्त विविध अनुष्ठान होंगे। अखाड़े के संरक्षक ऋषि अजयदास की देखरेख में सभी सदस्य स्नान पर्वों पर खास अंदाज में डुबकी लगाएंगे। शिविर के लिए तैयारियां की जा रही हैं। माघ मेला क्षेत्र में अखाड़े के शिविर के लिए भूमि आवंटित किए जाने को लेकर माघ मेला प्रशासन के पास शीघ्र ही आवेदन किया जाएगा।
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किन्नर अखाड़ा माघ मेले के दौरान शासन-प्रशासन से प्रयाग अर्द्धकुंभ में अखाड़े के लिए जमीन के बारे में भी मांगपत्र सौंपेगा। हालांकि अब तक अखाड़ा परिषद और मेला प्रशासन की ओर से किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं दी गई है। वैसे अखाड़े की मान्यता के सवाल पर मुखिया महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने कहा, इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, किन्नरों को तो प्राकृतिक रूप से मान्यता मिली हुई है। बता दें, किन्नरों की ओर से स्वयंभू अखाड़ा बनाए जाने को लेकर अखाड़ा परिषद भी खासा नाराज है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि 13 अखाड़ों के अतिरिक्त किसी अन्य को न तो मान्यता है और न ही दी जाएगी।
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