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साधना का अभ्यास, शुरू हुआ कल्पवास
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 13 Jan 2017 01:50 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पौष पूर्णिमा पर माघ मेले की पहली डुबकी के साथ माह भर का कल्पवास भी आरंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने संयमित शैली में साधना के अभ्यास और माह भर के अनुशासन का संकल्प लिया। मां गंगा, नगर देवता हनुमान और वेणी माधव के बाद पुरखों का आशीष भी लिया।
कुटिया के बाहर तुलसी का चौरा लगाया गया क्योंकि प्रयाग द्वादश माधव का क्षेत्र है, सो भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए तुलसी पूजन का विधान है। इसी तरह कुटिया के बाहर जौ भी बोया गया। इस बारे में मान्यता है कि जौ की पौध के बढ़ने के साथ ही सर्वमंगल और सर्वप्रगति होती है।
संगम की रेती पर माह भर के कल्पवास के दौरान व्रत, तप, पूजा-अनुष्ठान के साथ नियम-संयम का विशेष ध्यान रखा जाएगा। संकल्प के अनुशासन के तहत कल्पवासी दो समय स्नान और सिर्फ एक ही समय भोजन करेंगे। साथ ही भूमि शयन भी करेंगे। तीन बार गंगा स्नान और एक बार भोजन के साथ संतों के प्रवचन सुनने का सिलसिला शुरू हुआ।
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पौष पूर्णिमा पर काशीसुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, स्वामी सर्वभूतानंद, स्वामी सुहृयानंद, सतुआबाबा संतोषदास, स्वामी आनंद गिरि, स्वामी ब्रह्माश्रम, अच्युत प्रपन्नचार्य आदि ने संगम सहित विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। संगम तट पर स्नान के बाद काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने तीर्थराज प्रयाग की महिमा बखानी।
पहले स्नानपर्व के दौरान कमांडो आरएएफ के जवान मुस्तैदी से चप्पे चप्पे पर तैनात थे। पुलिस, प्रशासन के अतिरिक्त नागरिक सुरक्षा कोर के स्वयंसेवकों ने भी सहयोग किया। डिप्टी कंट्रोलर अनुराधा सिंह, चीफ वार्डेन की देखरेख में स्वयंसेवकों ने गंगा को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए सेवाकार्य किया। टीम में एलके अहेरवार, रविशंकर द्विवेदी, नागेंद्र सरदार अजीत सिंह, याकूब, सुरेंद्र यादव, भोलेश्वर, राजीव भनोट आदि मौजूद थे।
पौष पूर्णिमा पर मेला क्षेत्र में जगह-सब्जी पूड़ी बटती रही। कई शिविरों में सुबह पूड़ी सब्जी दोपहर में कढ़ी चावल बांटा गया। त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्थित शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, काशीसुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, दंडीबाड़ा में स्वामी ब्रह्माश्रम, स्वामी महेशाश्रम, संगम क्षेत्र अक्षयवट मार्ग में स्वामी आनंद गिरि, संगम लोअर रोड पर लाल महेंद्र शिव शक्ति सेवा समिति की ओर से पूड़ी सब्जी बंटती रही।
रेती पर बसे तंबुओं के शहर में संतों की वाणी गूंजने लगी है। महावीर मार्ग स्थित महंत नृत्यगोपाल दास के शिविर में बाबा राम गोपाल दास ने भक्ति उपासना एवं ज्ञान की चर्चा की। मान्यता है कि संगम की रेती पर सांसरिक मायाजाल से दूर रहकर चिंतन मनन करने से तमाम तरह के विकारों का नाश होता है। समाज की उन्नति के लिए भी साधना जरूरी है। खाक चौक के महामंत्री सतुआबाबा संतोष दास ने कहा कि त्रिवेणी तट पर आने वाले आपसी भाईचारा एवं सद्भाव की मिसाल बनें। सदानंद तत्वज्ञान परिषद शिविर में महात्मा दशरथ ने आत्मा परमात्मा के अनन्य संबंधों को रेखांकित किया। दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा, संगम मार्ग स्थित संतों के शिविरों में हरिनाम संकीर्तन, प्रवचन हुआ।
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कुटिया के बाहर तुलसी का चौरा लगाया गया क्योंकि प्रयाग द्वादश माधव का क्षेत्र है, सो भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए तुलसी पूजन का विधान है। इसी तरह कुटिया के बाहर जौ भी बोया गया। इस बारे में मान्यता है कि जौ की पौध के बढ़ने के साथ ही सर्वमंगल और सर्वप्रगति होती है।
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संगम की रेती पर माह भर के कल्पवास के दौरान व्रत, तप, पूजा-अनुष्ठान के साथ नियम-संयम का विशेष ध्यान रखा जाएगा। संकल्प के अनुशासन के तहत कल्पवासी दो समय स्नान और सिर्फ एक ही समय भोजन करेंगे। साथ ही भूमि शयन भी करेंगे। तीन बार गंगा स्नान और एक बार भोजन के साथ संतों के प्रवचन सुनने का सिलसिला शुरू हुआ।
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पौष पूर्णिमा पर काशीसुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, स्वामी सर्वभूतानंद, स्वामी सुहृयानंद, सतुआबाबा संतोषदास, स्वामी आनंद गिरि, स्वामी ब्रह्माश्रम, अच्युत प्रपन्नचार्य आदि ने संगम सहित विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। संगम तट पर स्नान के बाद काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने तीर्थराज प्रयाग की महिमा बखानी।
पहले स्नानपर्व के दौरान कमांडो आरएएफ के जवान मुस्तैदी से चप्पे चप्पे पर तैनात थे। पुलिस, प्रशासन के अतिरिक्त नागरिक सुरक्षा कोर के स्वयंसेवकों ने भी सहयोग किया। डिप्टी कंट्रोलर अनुराधा सिंह, चीफ वार्डेन की देखरेख में स्वयंसेवकों ने गंगा को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए सेवाकार्य किया। टीम में एलके अहेरवार, रविशंकर द्विवेदी, नागेंद्र सरदार अजीत सिंह, याकूब, सुरेंद्र यादव, भोलेश्वर, राजीव भनोट आदि मौजूद थे।
पौष पूर्णिमा पर मेला क्षेत्र में जगह-सब्जी पूड़ी बटती रही। कई शिविरों में सुबह पूड़ी सब्जी दोपहर में कढ़ी चावल बांटा गया। त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्थित शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, काशीसुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, दंडीबाड़ा में स्वामी ब्रह्माश्रम, स्वामी महेशाश्रम, संगम क्षेत्र अक्षयवट मार्ग में स्वामी आनंद गिरि, संगम लोअर रोड पर लाल महेंद्र शिव शक्ति सेवा समिति की ओर से पूड़ी सब्जी बंटती रही।
रेती पर बसे तंबुओं के शहर में संतों की वाणी गूंजने लगी है। महावीर मार्ग स्थित महंत नृत्यगोपाल दास के शिविर में बाबा राम गोपाल दास ने भक्ति उपासना एवं ज्ञान की चर्चा की। मान्यता है कि संगम की रेती पर सांसरिक मायाजाल से दूर रहकर चिंतन मनन करने से तमाम तरह के विकारों का नाश होता है। समाज की उन्नति के लिए भी साधना जरूरी है। खाक चौक के महामंत्री सतुआबाबा संतोष दास ने कहा कि त्रिवेणी तट पर आने वाले आपसी भाईचारा एवं सद्भाव की मिसाल बनें। सदानंद तत्वज्ञान परिषद शिविर में महात्मा दशरथ ने आत्मा परमात्मा के अनन्य संबंधों को रेखांकित किया। दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा, संगम मार्ग स्थित संतों के शिविरों में हरिनाम संकीर्तन, प्रवचन हुआ।