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वीणा की तान पर मंत्रमुग्ध हुए एचआरआई के वैज्ञानिक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को सात्विक वीणा की सौगात देने वाले मशहूर वीणा वादक सलिल भट्ट ने शनिवार को झूंसी के छतनाग गांव स्थित हरिश्चंद्र शोध संस्थान में अपना कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम का आयोजन स्पीक मैके की ओर से किया गया था। वीणा की तान सुनकर एचआरआई के वैज्ञानिक मंत्रमुग्ध हो गए। मशहूर वीणा वादक सलिल की आज की प्रस्तुति सुप्रसिद्ध सूफी गायक प्यारेलाल वडाली के नाम रही। उन्होंने अपने कार्यक्रम के जरिए प्यारेलाल को श्रद्धांजलि दी। प्यारेलाल का शुक्रवार को अमृतसर में दिला का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।
एचआरआई परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एसके मजूमदार के दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद मशहूर वीणा वादक सलिल भट्ट ने अपने साथी कलाकारों के साथ वीणा की तान छेड़ी। हाल ही में ग्लोबल इंडियन की उपाधि से विभूषित सलिल भट्ट अपने एकल वादन और सात्विक वीणा की रचना के लिए जाने जाते हैं। साथी कलाकारों के साथ तबले और ढोलक पर उनकी जुगलबंदी भी देखने को बनती है। राग द्वेष पर आधारित गीत बालम जी हमार छिन-छिन बरसे मेघ की प्रस्तुति पर लोगों की खूब तालियां बजीं। राजस्थान के प्राचीन भैरवी राग पर सलिल भट्ट के वीणा और तबले पर मौजूद अभिषेक मिश्र की जुगलबंदी ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। जुगलबंदी के दौरान संगीता ने राजस्थानी नृत्य भी प्रस्ुतत किया। ढोलक गौश खान तथा करताल पर तुकला खान ने अपनी प्रस्तुति पेश की।
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एचआरआई परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एसके मजूमदार के दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद मशहूर वीणा वादक सलिल भट्ट ने अपने साथी कलाकारों के साथ वीणा की तान छेड़ी। हाल ही में ग्लोबल इंडियन की उपाधि से विभूषित सलिल भट्ट अपने एकल वादन और सात्विक वीणा की रचना के लिए जाने जाते हैं। साथी कलाकारों के साथ तबले और ढोलक पर उनकी जुगलबंदी भी देखने को बनती है। राग द्वेष पर आधारित गीत बालम जी हमार छिन-छिन बरसे मेघ की प्रस्तुति पर लोगों की खूब तालियां बजीं। राजस्थान के प्राचीन भैरवी राग पर सलिल भट्ट के वीणा और तबले पर मौजूद अभिषेक मिश्र की जुगलबंदी ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। जुगलबंदी के दौरान संगीता ने राजस्थानी नृत्य भी प्रस्ुतत किया। ढोलक गौश खान तथा करताल पर तुकला खान ने अपनी प्रस्तुति पेश की।
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