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Prayagraj News: छुट्टियाें का सीजन... सूटकेस जेब पर भारी
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शादियों के सीजन में लगेज ट्रॉली का दाम बढ़ गया। चौक स्थित एक शोरूम में खरीदारी करते लोग। अमर उज
शादियों और गर्मी की छुट्टियों के सीजन की वजह से अलग-अलग वैराइटी के ट्रैवल बैग और सूटकेस की मांग बढ़ी है। इस वजह से इनकी कीमत में भी 20 फीसदी तक इजाफा है। छुट्टियाें का सीजन में सूटकेस अब जेब पर भारी पड़ने लगे हैं।
पॉलिमर और अन्य जरूरी कच्चे माल की कीमत में 35 से 40 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर सूटकेस और ट्रॉली बैग के दाम पर दिखाई दे रहा है। ब्रांडेड कंपनियों से लेकर स्थानीय निर्माताओं तक ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।
शहर के व्यस्त व्यापारिक केंद्र चौक, कटरा, जॉनसेनगंज और जवाहर स्क्वायर के शोरूम्स में ग्राहकों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन नई कीमतों को सुनकर मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट डगमगा रहा है। जो ट्रॉली बैग पहले तीन से चार हजार रुपये की रेंज में आसानी से उपलब्ध थे, अब उनके लिए ग्राहकों को 400 से 700 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। छोटे निर्माताओं ने भी लागत का हवाला देते हुए कीमत में 10 से 15 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
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महंगाई ने बदला खरीदारी का तरीका
कीमतों में आई उछाल से ग्राहकों की पसंद और खरीदारी का तरीका बदल गया है। जॉनसेनगंज की कारोबारी पल्लवी अरोड़ा बताती हैं कि लोग अब फिजूलखर्ची से बचने के लिए बड़े आकार के बैग्स के बजाय छोटे केबिन साइज बैग्स को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। कारोबारी रवि कुमार और मोहम्मद एलियास का कहना है कि मध्यम वर्ग अब भारी-भरकम और प्रीमियम ब्रांडेड ट्रॉली बैग्स से दूरी बना रहा है।
पॉलीकार्बोनेट और एल्युमीनियम फ्रेम वाले बैग आसमान छूती कीमतों के कारण आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। इस बार छुट्टियों और शादियों का सफर सूटकेस की बढ़ी कीमतों के कारण थोड़ा फीका पड़ता दिख रहा है।
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पॉलिमर और अन्य जरूरी कच्चे माल की कीमत में 35 से 40 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर सूटकेस और ट्रॉली बैग के दाम पर दिखाई दे रहा है। ब्रांडेड कंपनियों से लेकर स्थानीय निर्माताओं तक ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।
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शहर के व्यस्त व्यापारिक केंद्र चौक, कटरा, जॉनसेनगंज और जवाहर स्क्वायर के शोरूम्स में ग्राहकों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन नई कीमतों को सुनकर मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट डगमगा रहा है। जो ट्रॉली बैग पहले तीन से चार हजार रुपये की रेंज में आसानी से उपलब्ध थे, अब उनके लिए ग्राहकों को 400 से 700 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। छोटे निर्माताओं ने भी लागत का हवाला देते हुए कीमत में 10 से 15 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
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महंगाई ने बदला खरीदारी का तरीका
कीमतों में आई उछाल से ग्राहकों की पसंद और खरीदारी का तरीका बदल गया है। जॉनसेनगंज की कारोबारी पल्लवी अरोड़ा बताती हैं कि लोग अब फिजूलखर्ची से बचने के लिए बड़े आकार के बैग्स के बजाय छोटे केबिन साइज बैग्स को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। कारोबारी रवि कुमार और मोहम्मद एलियास का कहना है कि मध्यम वर्ग अब भारी-भरकम और प्रीमियम ब्रांडेड ट्रॉली बैग्स से दूरी बना रहा है।
पॉलीकार्बोनेट और एल्युमीनियम फ्रेम वाले बैग आसमान छूती कीमतों के कारण आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। इस बार छुट्टियों और शादियों का सफर सूटकेस की बढ़ी कीमतों के कारण थोड़ा फीका पड़ता दिख रहा है।