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राजस्व विभाग के अलग कैडर गठन पर जानकारी तलब

Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:06 AM IST
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hisgh court ask the goverment for  seprate cadder
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में राजस्व अधिकारियों के अलग कैडर गठन की दिशा में क्या प्रगति हुई है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव राजस्व से एक जनवरी 2020 तक राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों और राजस्व अदालतों की संख्या की जानकारी भी मांगी है। पूछा है कि उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जा रही है या नहीं।
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कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या सरकार ने राजस्व अधिकारियों को मुकदमे तय करने का कोई लक्ष्य दिया गया है या वे न्यायिक कार्य के अलावा प्रशासनिक व शिष्टाचार कर्तव्य निभाने में ही समय जाया कर रहे हैं। कोर्ट ने राजस्व अदालतों में दशकों से लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण की कार्ययोजना भी मांगी है। हाईकोर्ट ने इस मामले पर जनहित याचिका कायम की है। इस पर अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने हाटा कुशीनगर की विमलावती देवी व दर्जनों अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के लिए आईं 28 याचिकाओं में से 18 याचिकाएं वरासत, सीमांकन, विभाजन एवं अतिक्रमण हटाने की मांग में दशकों से लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण की मांग की गई है, जो मामले कुछ दिन में तय होने चाहिए, वे दो दशक बाद भी लंबित हैं। 2015 में राजस्व अदालतों में छह लाख मुकदमे विचाराधीन थे। निस्तारित करने के निर्देश के बावजूद मुकदमे तय नहीं हो पा रहे हैं। प्रशासनिक कार्य में व्यस्तता के कारण तहसीलदार रूटीन आदेश भी नहीं दे पा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि राजस्व अदालतों के पीठासीन अधिकारी विधि स्नातक नहीं हैं। उन्हें कानून की बेसिक जानकारी तक नहीं है और ये राजस्व अधिकार तय कर रहे हैं।
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