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प्रदेश की सीमा में घुसने वाले हर व्यक्ति की सूची बनाने का निर्देश
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प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिये है और कड़ाई से पालन करने और कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। क्वारन्टीन सेन्टर की दुर्दशा की शिकायत को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।कोर्ट ने कहा है कि लाक डाउन के दौरान प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की सूची तैयार की जाय और इनके स्वास्थ्य की निगरानी के,लिए 400 व्यक्तियों पर एक अधिकारी तैनात किया जाय।जो अपनी सूची के लोगों के फोन नंबर से उनके स्वास्थ्य की जानकारी रखे।यदि किसी को खाना नहीं मिला है तो खाना उपलब्ध कराये।
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कोर्ट ने कहा है कि जो लोग हाईवे से प्राइवेट साधन या पैदल प्रदेश में आये हैं, उनका पता लगाकर निगरानी सूची में शामिल किया जाय। कोर्ट ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आस पास प्रदेश के बाहर से आये व्यक्ति की जानकारी मिले तो वह शासन द्वारा जारी फोन नंबर पर इसकी सूचना तत्काल दें ताकि उसे निगरानी सूची में शामिल किया जा सके और बीमार होने पर इलाज हो सके।
कोर्ट ने कहा है कि बाहर से प्रदेश में आने वाले हर व्यक्ति को 15दिन क्वारन्टीन सेन्टर में अनिवार्य रूप से रखा जाय और सेन्टर की सफाई व सेनिटाइजेशन की व्यवस्था की जाय ताकि गंदगी से अन्य बीमारी न फैले। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह बाहर से आये लोगों के सुनियोजित तरीके से ठहरने की व्यवस्था करे।\nकोर्ट ने 18मई को कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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इसके अलावा कोर्ट ने प्रयागराज में कई निर्देशों के बावजूद अस्पतालों में जांच व इलाज की सुविधाएं उपलब्ध न कराने पर नाराजगी जताई और कहा है कि अस्पतालों, क्वारन्टीन सेन्टर में व्याप्त गंदगी व अव्यवस्था तथा शारीरिक दूरी बनाये रखने के दिशानिर्देश का पालन न करने के फोटोग्राफ स्वयं सच्चाई बता रहे हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि सरकार शहर के अस्पतालों व सामुदायिक केन्द्रो में जरूरी सुविधाएं क्यो नही दे पा रही है। कोर्ट ने कहा है कि वित्तीय दिक्कत है तो केन्द्र सरकार राज्य सरकार को मदद करे।
कोर्ट ने कहा कि एस आर एन अस्पताल के अलावा किसी अस्पताल में आई सी सी यू नहीं है। प्राइवेट अस्पतालों को बंद कर दिया गया है और सरकारी अस्पतालों में रोजमर्रा के मरीजों का इलाज नही हो,रहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि कब तक वह कल्विन, मोतीलाल नेहरू,टी बी ,बेली अस्पतालों सहित जिले के 105 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सुविधाएं उपलब्ध करायेगी।याचिका की सुनवाई 18मई को होगी।
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