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हाईकोर्ट : डिक्री की कार्रवाई पूरी हुए बिना बेदखली मामले में एसपी तलब

Sun, 17 Jul 2022 02:50 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 17 Jul 2022 02:50 AM IST
सार

याची की ओर से तर्क दिया गया कि सत्र न्यायालय बलिया ने मकान खाली कराने और बकाया किराये की वसूली के मामले में उसके खिलाफ आदेश पारित किया था। याची की  ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने से पहले ही पुलिस बल की सहायता से मकान से बेदखल करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया गया।

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High Court: SP summoned in eviction case without completion of decree
court - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिक्री की कार्रवाई पूरी हुए बिना मकान से बेदखल कराने के मामले में पुलिस की मौजूदगी को गलत माना है। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक बलिया सहित जिम्मेदार पुलिस अफसरों को तलब करते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसकेसाथ ही मामले की सुनवाई केलिए 22 जुलाई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय की पीठ ने मोहम्मद सईद तथा अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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याची की ओर से तर्क दिया गया कि सत्र न्यायालय बलिया ने मकान खाली कराने और बकाया किराये की वसूली के मामले में उसके खिलाफ आदेश पारित किया था। याची की  ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने से पहले ही पुलिस बल की सहायता से मकान से बेदखल करते हुए उसे ध्वस्त कर दिया गया। याची ने कहा कि सत्र न्यायालय की ओर से पारित डिक्री के बाद कोई निष्पादन मामला दर्ज नहीं किया गया था और न ही अपीलकर्ताओं को संपत्ति से बेदखल करने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू की गई थी।
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इसके बावजूद उन्हें बेदखल करते हुए मकान को तोड़ दिया गया। मामले में पुलिस ने सहयोग किया। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हु कोर्ट ने कहा, मामले में पुलिस अधीक्षक बलिया सहित मामले से जुड़े सभी पुलिस अधिकारी कोर्ट में पेश होकर व्यक्तिगत हलफनामे के जरिए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
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कोर्ट ने कहा पुलिस की कार्रवाई मनमाना, अवैध
कोर्ट ने कहा कि पुलिस बल राज्य की एक कानून प्रवर्तन एजेंसी है, जिसके पास नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का कर्तव्य है। अगर कानून प्रवर्तन एजेंसी स्वयं अवैध कार्य करती या किसी व्यक्ति को उसकी अवैध गतिविधि में सहायता करती है तो ऐसी कार्रवाई मनमाना और अवैध है। ऐसे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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