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High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में टेंट सिटी बनाए जाने के मामले में यूपी सरकार से मांगी जानकारी

Thu, 02 Mar 2023 10:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Mar 2023 10:38 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा किनारे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आध्यात्मिक विलासिता के लिए टेंट सिटी बनाए जाने के मामले में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस मामले में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

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High Court sought information from the UP government regarding the construction of a tent city in Varanasi
टेंट सिटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा किनारे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आध्यात्मिक विलासिता के लिए टेंट सिटी बनाए जाने के मामले में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस मामले में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने अनौकिक शनिधाम के पीठाधीश्वर प्रवीण मिश्रा और योगेंद्र कुमार पांडेय की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

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याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव, अधिवक्ता सुनीता शर्मा की ओर से कहा गया कि वाराणसी में गंगा किनारे बगैर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनएमसीजी व पर्यावरण बोर्ड से बगैर अनुमति लिए टेंट सिटी स्थापित किया जा रहा है। जबकि, भारत सरकार के सात अक्तूबर २०१६ के अनुसार गंगा के किनारे किसी भी प्रकार का स्थायी व अस्थायी आवासीय, व्यवसायिक तथा औद्योगिक उद्देश्य के लिए किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं कराया जा सकता।
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उत्तर प्रदेश सरकार टेंट सिटी बसाकर एक रात का किराया आठ हजार रुपये से लेकर 51 हजार रुपये तक वसूल किया जाएगा। यहां आम लोगों का प्रवेश नहीं होगा। इसके साथ ही टेंट सिटी से निकलने वाली गंदगी को गंगा में न मिलने पाए इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अधिवक्ता ने कहा कि गंगा में प्रदूषण होने से भक्तों और संतों की न केवल मानसिक आघात हो रहा है बल्कि उनकी धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच रहा है।
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साधु संत इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर प्रसाद द्वारा दिल्ली में यमुना किराने टेंट लगाकर अधिवेशन किए जाने पर एनजीटी ने पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि, अर्जी पर सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष खन्ना ने विरोध किया। कहा कि वहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इस पर याची अधिवक्ता ने कहा कि इस तरह के प्लांट लगने के बावजूद गंगा प्रदूषित हैं। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

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