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High Court : हत्या व जानलेवा हमले के चार दोषियों की सजा बरकरार, अपील खारिज
Mon, 27 Jul 2026 05:00 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:00 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के 33 साल पुराने हत्या व जानलेवा हमले के मामले में चार दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही जमानत पर चल रहे चारों दोषियों को एक माह के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर शेष सजा भुगतने का आदेश दिया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के 33 साल पुराने हत्या व जानलेवा हमले के मामले में चार दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही जमानत पर चल रहे चारों दोषियों को एक माह के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण कर शेष सजा भुगतने का आदेश दिया है। यह आदेश विनय कुमार द्विवेदी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की खंडपीठ ने बाबूखान और सात अन्य की अपील पर दिया है।
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मिर्जापुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में वर्ष 1988 में गोलीबारी हुई थी। इस घटना में नौ लोग गोली लगने से घायल हुए थे, जबकि बदरुद्दीन की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। मामले में सत्र अदालत ने सात आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी करते हुए दंगा, घातक हथियार से लैस होकर बलवा और जानलेवा हमले के आरोप में दोषी ठहराया था। वहीं हाशिम खान को हत्या समेत अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
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अपील की सुनवाई के दौरान चार आरोपियों बाबू खान, सईद खान, जफरू खान और नजरू खान की मौत हो गई। इसके बाद उनके संबंध में अपील समाप्त हो गई। जीवित अपीलकर्ताओं मलिक खान, इरशाद खान, रुस्तम खान और हाशिम खान की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों से आरोप सिद्ध होते हैं। साक्ष्यों में ऐसी कोई गंभीर विसंगति नहीं है, जिससे ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत या कानून के विपरीत माना जाए।
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