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हाईकोर्ट ने कहा : तिरंगे पर कुरान की आयतें लिखना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान

Sat, 17 Aug 2024 12:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 Aug 2024 12:51 PM IST
सार

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने गुलामुद्दीन व पांच अन्य की ओर से ट्रायल कोर्ट से राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए की। मामला जालौन जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

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High Court said: Writing Quranic verses on the tricolor is an insult to the national flag.
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तिरंगे पर कुरान की आयतें लिखना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को लेकर दर्ज मामले को रद्द करने से इन्कार कर दिया।

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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने गुलामुद्दीन व पांच अन्य की ओर से ट्रायल कोर्ट से राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए की। मामला जालौन जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
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उपनिरीक्षक अनिल कुमार ने मोहम्मद इरशाद अंसारी समेत पांच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक, आरोपी धार्मिक जुलूस के दौरान जिस तिरंगे को लेकर चल रहे थे। उस पर कुरान की आयतें लिखी थीं। विवेचना के बाद पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को तलब किया। आरोपियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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याचियों की दलील

याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर निराधार है। जुलूस में जिस ध्वज का प्रयोग किया गया वह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। दावा किया कि पुलिस ने बदनियती से मामला दर्ज किया है। जबकि, विवेचना के दौरान तिरंगे के प्रति शरारत के सुबूत नहीं मिले। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति किसी भी तरह का अनादर गंभीर सामाजिक और सांस्कृतिक दुष्परिणाम पैदा कर सकता है, खासकर भारत के विविधतापूर्ण समाज में। ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल समुदायों के बीच सांप्रदायिक कलह या गलतफहमियां पैदा करने के लिए किया जा सकता है। राष्ट्रीय ध्वज पर कुरान की आयतें अंकित करना भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 का उल्लंघन है।

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