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हाईकोर्ट ने कहा : मजिस्ट्रेट को है विवेचना की निगरानी का अधिकार
Fri, 21 Jan 2022 11:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Jan 2022 11:46 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश केसाथ संभल के गुन्नौर थाने में दर्ज अपहरण केस की सही विवेचना करने की मांग में दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि याची सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी देकर उसे मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है।
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allahabad high court
- फोटो : social media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों की पुलिस की ओर से विवेचना सही तरीके से नहीं की जा रही है तो अनुच्छेद 226 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निष्पक्ष विवेचना की गुहार लगाने के बजाय मजिस्ट्रेट की अदालत में जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के साकिरी बसु केस का हवाला दिया।
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कहा कि मजिस्ट्रेट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने, दर्ज एफ आईआर की निष्पक्ष विवेचना कराने या सही विवेचना न होने पर विवेचना अधिकारी बदलने या दूसरी एजेंसी को जांच स्थानांतरित करने सहित केस की निगरानी करने का अधिकार है। यह आदेश सत्य प्रकाश की याचिका पर न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए दिया है।
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हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश केसाथ संभल के गुन्नौर थाने में दर्ज अपहरण केस की सही विवेचना करने की मांग में दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि याची सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी देकर उसे मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है।
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याचिका में संभल के गुन्नौर थाने में 2021 में दर्ज अपहरण केस की निष्पक्ष विवेचना करने का समादेश जारी करने की मांग की गई थी। याची का कहना था कि पुलिस अभियुक्तों से मिली हुई है। सही तरीके से विवेचना नहीं कर रही है। अभी तक न किसी अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया और न ही दर्ज एफआईआर में चार्जशीट ही दाखिल की गई है।