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Prayagraj News: हाजी इकबाल की एफआईआर रद्द करने से हाईकोर्ट का इन्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 01:58 AM IST
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High Court refuses to quash Haji Iqbal's FIR
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व विधान परिषद सदस्य हाजी इकबाल उर्फ बाला से जुड़े कथित 6.33 करोड़ रुपये के रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले की जांच एसटीएफ से लेकर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को स्थानांतरित कर दी है। साथ ही कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इन्कार करते हुए कहा कि ऐसा करने पर शिकायतकर्ता उपचार के अधिकार से वंचित हो जाएगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने हाजी इकबाल की याचिका पर दिया। हाजी इकबाल के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर के इकोटेक- तृतीय थाने में एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि दिसंबर 2013 से मार्च 2014 के बीच हाजी इकबाल ने ग्रेटर नोएडा में रियल एस्टेट परियोजना के लिए एक कंपनी को 6.33 करोड़ रुपये दिए। आरोप है कि कंपनी ने न तो निर्माण कार्य कराया और न ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को किस्तों का भुगतान किया। इसके चलते प्राधिकरण ने बकाये का भुगतान न होने के आधार पर भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने हाजी इकबाल और कथित शेल कंपनियों के नेटवर्क की जांच एसएफआईओ को सौंपी थी। जांच पूरी होने के बाद एसएफआईओ ने नई दिल्ली की विशेष अदालत में शिकायत दाखिल की।
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कोर्ट ने कहा कि एसएफआईओ की शिकायत और वर्तमान एफआईआर को साथ पढ़ने पर दोनों में समान कंपनियां और कथित कार्यप्रणाली सामने आती है। कोर्ट ने कहा कि यदि एसटीएफ समान कॉरपोरेट नेटवर्क की अलग जांच जारी रखती है तो एक ही कथित धोखाधड़ी की समानांतर और खंडित जांच होगी।
कोर्ट ने कहा कंपनियां अधिनियम, 2013 के तहत जब केंद्र सरकार किसी मामले की जांच एसएफआईओ को सौंप देती है तो उसी विषय पर अन्य जांच एजेंसी आगे जांच नहीं कर सकती। हालांकि कोर्ट ने कहा कि एसएफआईओ की शिकायत में शिकायतकर्ता के भूखंड से जुड़े लेनदेन की अलग से जांच नहीं की गई है। इसलिए शिकायतकर्ता के अधिकारों की रक्षा और समानांतर जांच से बचने के लिए एसटीएफ की जांच एसएफआईओ को स्थानांतरित की जाती है।

कोर्ट ने एसटीएफ को निर्देश दिया कि वह केस डायरी और जब्त समस्त सामग्री एसएफआईओ को सौंपे। साथ ही एसएफआईओ को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत आगे की जांच कर आवश्यकता होने पर नई दिल्ली की विशेष अदालत में अनुपूरक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए केंद्र सरकार से किसी नए अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
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