फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Prosecution cannot be allowed to use law as an arena

हाईकोर्ट : अभियोजन को कानून का प्रयोग अखाड़े के रूप में करने की नहीं दी जा सकती छूट

Sat, 06 May 2023 11:41 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 May 2023 11:41 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समाज में प्रभावशाली लोग अपने प्रतिद्वंद्वियों को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश करते हैं। ताकि, उन्हें कुछ समय के लिए जेल भेजकर उनकी बदनामी करा सके।

विज्ञापन
High Court: Prosecution cannot be allowed to use law as an arena
court new - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समाज में प्रभावशाली लोग अपने प्रतिद्वंद्वियों को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश करते हैं। ताकि, उन्हें कुछ समय के लिए जेल भेजकर उनकी बदनामी करा सके। लेकिन, अभियोजन को इसकी स्वीकृति नहीं दी जा सकती है कि कानून को अखाड़े के रूप में इस्तेमाल कर अपना स्कोर बढ़ा सकें।

विज्ञापन

कोर्ट ने मौजूदा मामले में माना कि पत्नी की मौत गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर सेप्टिसिमिया से हुई। जिससे कि उसके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर दिए। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि दहेज के लिए उसके पति ने उत्पीड़न किया, जिससे कि महिला की मौत हो गई। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ मेरठ के याची उदित आर्या की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। उसे निजी मुचलके और दो प्रतिभूतियों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।

विज्ञापन

अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति कृष्णा पहल सुनवाई कर रहे थे। याची के खिलाफ उसकी पत्नी की मौत के बाद उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर मेरठ के गंगानगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कहा गया कि पति ने दहेज में 60 लाख रुपये और एक कार की मांग की। जब दहेज नहीं मिला तो उसका उत्पीड़न किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

याची के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल की पत्नी की तबीयत खराब थी। वह मायके चली गई और वहां रहने के दौरान उसने गर्भपात कराया था। इस वजह से उसकी हालत गंभीर हो गई। इसी दौरान उसे डेंगू भी हो गया। पति ने उसे खून भी दिया था। हॉस्पिटल के रिकॉर्ड पर सारी चीजें दर्ज हैं। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पाया कि यह प्राथमिकी कानून का दुरुपयोग है। पत्नी की मौत सेप्टिसिमिया की वजह से हुई थी। लिहाजा, कोर्ट ने पति/याची की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed