फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court No second bail applicationentertained without any new and substantial change in circumstances

High Court : बिना किसी नए और ठोस परिस्थितिगत बदलाव के दूसरी जमानत अर्जी पर विचार नहीं

Sat, 28 Mar 2026 01:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 28 Mar 2026 01:51 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली जमानत याचिका खारिज होने के बाद बिना किसी नए और ठोस परिस्थितिगत बदलाव के दूसरी जमानत अर्जी पर विचार नहीं किया जा सकता। केवल नए तर्क पेश करने से जमानत नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन
High Court No second bail applicationentertained without any new and substantial change in circumstances
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली जमानत याचिका खारिज होने के बाद बिना किसी नए और ठोस परिस्थितिगत बदलाव के दूसरी जमानत अर्जी पर विचार नहीं किया जा सकता। केवल नए तर्क पेश करने से जमानत नहीं दी जा सकती। इसके लिए तथ्यात्मक स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन होना जरूरी है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने आरोपी तुफैल चौधरी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

विज्ञापन


तुफैल चौधरी के खिलाफ गाजियाबाद के कौशांबी थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि पुलिस ने एक ट्रक से 15 हजार बोतल प्रतिबंधित फेन्सिडिल कफ सिरप बरामद किया था। ट्रक को आरोपी तुफैल चौधरी चला रहा था। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी केवल वाहन चालक है और माल से उसका कोई संबंध नहीं है। इस मामले में सह आरोपी को जमानत मिल चुकी है और तुफैल लंबे समय से जेल में है। इसलिए उसे भी राहत दी जाए।
विज्ञापन


वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप की बरामदगी हुई है। आरोपी को सिर्फ वाहन चालक नहीं माना जा सकता, उस पर माल के बारे में भी जानकारी होने का आरोप बनता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की पहली जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है और वर्तमान अर्जी में कोई नया या महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आया है। ऐसी स्थिति में दूसरी जमानत अर्जी स्वीकार करना न्यायिक अनुशासन के विपरीत होगा। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed