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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Mere presence of a trust's office on the disputed property cannot be construed as fraud.

हाईकोर्ट : सिर्फ विवादित संपत्ति में ट्रस्ट का कार्यालय होने से धोखाधड़ी नहीं मानी जा सकती

Wed, 14 Oct 2026 11:58 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Oct 2026 11:58 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल विवादित संपत्ति में ट्रस्ट का पंजीकृत कार्यालय होने से यह नहीं माना जा सकता कि ट्रस्ट बनाने वाला व्यक्ति उस संपत्ति का मालिक बन गया या उसने कोई धोखाधड़ी की है।

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High Court Mere presence of a trust's office on the disputed property cannot be construed as fraud.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल विवादित संपत्ति में ट्रस्ट का पंजीकृत कार्यालय होने से यह नहीं माना जा सकता कि ट्रस्ट बनाने वाला व्यक्ति उस संपत्ति का मालिक बन गया या उसने कोई धोखाधड़ी की है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने जालसाजी के मामले में दाखिल आरोपपत्र, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने माया शर्मा की अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है।

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वाराणसी के प्रशांत शर्मा ने 12 दिसंबर 2014 को रजिस्टर्ड बैनामे के जरिये वाराणसी के लछीपुरा, सिकरौल स्थित विवादित मकान खरीदा था। आरोप था कि माया शर्मा ने अन्य लोगों के साथ मिलकर पहले ही इस संपत्ति के संबंध में जागृति ट्रस्ट बना लिया था और उसका पंजीकृत कार्यालय विवादित मकान में दिखाया था। शिकायत के आधार पर माया शर्मा के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में पुलिस ने एफआईआर कर लिया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए समन जारी किया। याची माया समन आदेश सहित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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याची अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह व ज्ञान प्रकाश सिंह ने दलील दी कि विवादित मकान पैतृक संपत्ति थी और ट्रस्ट डीड 26 अगस्त 2009 को तैयार की गई थी। संपत्ति के बंटवारे को लेकर समझौता 15 जनवरी 2010 को हुआ। इसलिए ट्रस्ट डीड तैयार करते समय याची को संपत्ति में सह-स्वामी के रूप में अधिकार प्राप्त थे। ट्रस्ट डीड के निष्पादन से कोई अपराध नहीं बनता और आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का औचित्य नहीं है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पक्षकारों के बीच संपत्ति को लेकर दीवानी मुकदमा लंबित है। प्रथम दृष्टया ट्रस्ट डीड बनाने से माया शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के अपराध नहीं बनते। इसी के साथ कोर्ट ने लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

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