{"_id":"69fdb87a78f02114410ec33a","slug":"high-court-it-is-wrong-to-punish-without-recovery-of-weapons-and-looted-goods-2026-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : हथियार व लूटे गए माल की बरामदगी के बिना सजा देना गलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : हथियार व लूटे गए माल की बरामदगी के बिना सजा देना गलत
Fri, 08 May 2026 03:48 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 08 May 2026 03:48 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लूट के मामले में स्पष्ट किया कि हथियार और लूटे गए माल की बरामदगी के बिना किसी आरोपी को सजा देना गलत है।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लूट के मामले में स्पष्ट किया कि हथियार और लूटे गए माल की बरामदगी के बिना किसी आरोपी को सजा देना गलत है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट फतेहपुर की ओर से 21 मई 1986 को सुनाए गए दोषसिद्धि के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी भोला को बरी कर दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। फतेहपुर में 29 जनवरी 1985 को एक लूट की वारदात हुई। शिकायतकर्ता सुशीला देवी ने एफआईआर दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि हथियार के साथ भोला और उसके साथियों ने उसे रोका और तमंचे के बल पर जेवरात लूट लिए। मौके पर पहुंचे ग्रामीण बाबू सिंह और छेड्डू बदमाशों की गोली से घायल हो गए।
विज्ञापन
हालांकि, उन लोगों ने ही आरोपी भोला को पकड़ा था जबकि दूसरा बदमाश लूट का सामान लेकर भाग गया। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में आरोपी भोला को दोषी ठहराते हुए पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश को आरोपी भोला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर पांच महिलाएं मौजूद थीं लेकिन अभियोजन ने स्वतंत्र गवाहों को पेश नहीं किया। इसके अलावा घटना रात 8 बजे की बताई गई थी और एफआईआर अगले दिन सुबह 11:30 बजे दर्ज कराई गई। एफआईआर दर्ज कराने की देरी के लिए कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। पकड़े गए आरोपी भोला के पास से न तो कोई हथियार बरामद हुआ और न ही लूटा गया सामान।
जिस सह-आरोपी पर गोली चलाने और लूट का माल ले जाने का मुख्य आरोप था वह पहले ही बरी किया जा चुका था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को हवाला देते हुए कहा कि यदि साक्ष्य कमजोर हों और अभियोजन की कहानी में झोल हो, तो आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने भोला की पांच साल सजा को समाप्त करते हुए उसे बरी कर दिया।