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UP : हाईकोर्ट की टिप्पणी- शादी के बहाने महिलाओं का शोषण करने वाली बढ़ती प्रवृत्तियों को कुचलना जरूरी

Fri, 26 Dec 2025 07:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 26 Dec 2025 07:34 PM IST
सार

Allahabad High Court : शादी का झूठा झांसा देकर एक महिला के साथ पांच वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाने वाले की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं का शोषण करने वाली बढ़ती सामाजिक प्रवृत्तियों को शुरुआत में ही कुचलना आवश्यक है। मामला औरैया जिले के थाना औरैया से जुड़ा है। 

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High Court It is necessary to crush growing trend of exploiting women under pretext of marriage
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बहाने महिलाओं का शोषण करने वाली बढ़ती सामाजिक प्रवृत्तियों को शुरुआत में ही कुचलना आवश्यक है। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर एक महिला के साथ पांच वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी प्रशांत पाल की अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने दिया है।

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औरैया जिले के थाना औरैया में आरोपी प्रशांत पाल के खिलाफ शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोप में एक युवती ने मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपी ने इस मामले में हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दायर की है। आरोपी के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे और पीड़िता बालिग है। दोनों 2020 से साथ रह रहे थे और आवेदक ने कभी शादी का वादा नहीं किया था। अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी ने पांच साल तक पीड़िता का शोषण किया। अश्लील वीडियो के आधार पर पीड़िता को धमकाने का भी आरोप है। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी। वह केवल अपनी इच्छापूर्ति के लिए संबंध बनाया। उसका पीड़िता से शादी करने का कोई इरादा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा राज्य मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि शादी का वादा शुरू से ही झूठा हो और उसका उद्देश्य संबंध बनाने के लिए केवल महिला की सहमति पाना है, तो ऐसी सहमति शून्य मानी जाती है। कोर्ट ने इसे समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना और कहा कि ऐसे मामलों में कोई उदारता नहीं दिखाई जा सकती। इसी के साथ कोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी रद्द कर दी।

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