High Court : गबन के मामले में अपील लंबित होने के बावजूद दर्ज एफआईआर नहीं होगी रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन के गबन के मामलों में विभागीय अपील लंबित होना पुलिस जांच में बाधा नहीं बन सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन के गबन के मामलों में विभागीय अपील लंबित होना पुलिस जांच में बाधा नहीं बन सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रावती देवी उर्फ इंद्रावती देवी और अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की ओर से वित्तीय अनियमितता और आपराधिक विश्वासघात की पुष्टि कर दी जाती है तो उस मामले की गहन जांच करना अनिवार्य हो जाता है, क्योंकि इसमें जनता का पैसा शामिल होता है।
सिद्धार्थनगर के मनरेगा लोकपाल ने एक शिकायत की जांच के बाद पाया था कि याचियों ने 7,91,328 रुपये का गबन किया है। इस आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचियों ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों ने लोकपाल के निर्णय के विरुद्ध लखनऊ स्थित राज्य मनरेगा प्रकोष्ठ के अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की है। ऐसे में अपील का निर्णय आने से पहले एफआईआर दर्ज करना गलत है।
हालांकि, पीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अपराध संज्ञेय होने की स्थिति में प्रथम सूचनाकर्ता को रिपोर्ट दर्ज कराने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने अंततः हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याची अपनी निर्दोषता जांच और बाद में होने वाले ट्रायल के दौरान साबित कर सकते हैं।
Prayagraj : साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खाते के धारक को मिली अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खाते के धारक को अग्रिम जमानत दे दी हैैै। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मनीष पांडेय की याचिका पर दिया है। मनीष पांडेय के खिलाफ प्रयागराज के साइबर क्राइम थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
याची के अधिवक्ता ने दलील कि छह मई 2024 को उनकी प्रोपराइटरशिप फर्म प्रिमोज हेल्थ केयर के खाते में नौ संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए थे। इसके बाद कोई लेनदेन नहीं हुआ। उन्होंने सात मई 2024 को ही आईसीआईसीआई बैंक को इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन एफआईआर लगभग दो साल बाद दर्ज की गई। याची जांच में सहयोग कर रहा है। कोर्ट ने शर्तों के साथ आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी।
पुलिस कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग में दायर याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर से जुड़े एक मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीडी चौहान की एकलपीठ ने रामचंद जायसवाल की याचिका पर दिया है।
गोरखपुर निवासी याची ने याचिका में आरोप लगाया था कि थाना प्रभारी व दो सिपाही उनके घर में घुस गए। गालीगलौज करते हुए मोबाइल, रुपये व सोने की चैन उठा ले गए। सीआरपीसी की धारा 153(3) के तहत उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग में अर्जी दायर की, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज कर दी। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में वर्तमान याचिका दायर की। याची अधिवक्ता ने याची के घर पर पुलिस की मौजूदगी का फोटो प्रस्तुत किया। कोर्ट ने पाया कि गैंगस्टर के मामले में पुलिस याची के बेटे को पकड़ने गई थी। अन्य तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
आदेश को पूर्ण करने के लिए अधिशासी अभियंता को दिया तीन माह का समय
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के एक नलकूप से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका पर पहले के आदेश को पूर्ण करने के लिए नलकूप के अधिशासी अभियंता को तीन माह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने दया शंकर पांडेय की ओर से दायर अवमानना याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को पारित अपने आदेश में देवरिया सलेमपुर के नलकूप खंड-दो के अधिशासी अभियंता को दो माह के भीतर कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था। आदेश की प्रति पांच फरवरी 2026 को प्राप्त होने के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया।