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High Court : अंतिम मूल्यांकन से पहले परेशान नहीं कर सकता है बिजली विभाग, आपत्ति दाखिल करना उपभोक्ता का अधिकार

Wed, 11 Mar 2026 02:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 11 Mar 2026 02:48 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिल के अंतिम मूल्यांकन और आपत्तियों के निस्तारण से पहले बिजली विभाग उपभोक्ताओं को परेशान नहीं कर सकता। आपत्तियां दाखिल करना उपभोक्ता का कानूनी अधिकार है।

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High Court: Electricity department cannot harass before final assessment
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिल के अंतिम मूल्यांकन और आपत्तियों के निस्तारण से पहले बिजली विभाग उपभोक्ताओं को परेशान नहीं कर सकता। आपत्तियां दाखिल करना उपभोक्ता का कानूनी अधिकार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी देवकी नंदन त्रिपाठी की याचिका निस्तारित कर दी। कोर्ट ने याची को वसूली नोटिस के खिलाफ आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते की मोहलत दी है।

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साथ ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।याची ने बिजली विभाग की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे 44,32,810 रुपये के बकाये और 44,000 रुपये के चक्रवृद्धि ब्याज की वसूली की मांग की गई थी। याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विभाग की ओर से निर्धारित राशि में प्रक्रियात्मक खामियां हैं। विभाग ने अंतिम मूल्यांकन किए बगैर वसूली नोटिस जारी किया है।
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इस पर याची को आपत्ति दाखिल करने का भी अवसर नहीं दिया है। वहीं, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के पैनल अधिवक्ता ने दलील दी कि 21 फरवरी 2026 को प्रारंभिक मूल्यांकन नोटिस जारी किया गया था। कोर्ट ने पाया कि यूपी सप्लाई कोड, 2005 के तहत याची को आपत्ति दर्ज कराने कानूनी अधिकार है। आपत्तियों का निस्तारण किए बगैर वसूली समेत अन्य किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

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आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एसपी विवेचना की प्रगति पर हलफनामा दाखिल करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में कौशाम्बी के एसपी को विवेचना की प्रगति से संबंधित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 23 मार्च को मामले की सुनवाई होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने शिवपाल यादव उर्फ सिप्पल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

पिता ने आरोप लगाया है कि 20 वर्षीय बेटे अजय उर्फ नाटू का शव 26 अगस्त 2024 को तालाब में मिला था। मामले में आरोपी पप्पू पासी और लक्ष्मण पासी समेत अन्य लोगों के खिलाफ कौशाम्बी के पिपरी थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।

पुलिस ने अब तक केवल दो आरोपियों लक्ष्मण पासी और पप्पू पासी को 18 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ आठ जनवरी 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया। अन्य आरोपियों को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही उनके खिलाफ कोई पुलिस रिपोर्ट दाखिल की गई। याची की ओर से अधिवक्ता ने एफआईआर की निष्पक्ष विवेचना कराने का आदेश देने की मांग की। जिस पर कोर्ट ने कौशाम्बी के एसपी को विवेचना की प्रगति के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 

ज्ञानवापी मामले में 15 अप्रैल को होगी सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने की वैज्ञानिक सर्वे की मांग को लेकर राखी सिंह की ओर से दायर पुनरीक्षण अर्जी पर सुनवाई की। प्रतिवादियों के अधिवक्ता सैयद अहमद फैजान ने कोर्ट को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में ज्ञानवापी प्रकरण से जुड़े मामले की सुनवाई 13 मार्च को होनी है। इस पर कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने अगली तिथि 15 अप्रैल नियत की। हाईकोर्ट ने इसी याचिका के साथ ही प्राचीन मूर्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर और अन्य की याचिका भी संबद्ध कर ली है। दोनों की सुनवाई एक साथ होगी। 

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