High Court : 16 वर्षीय बेटी की बरामदगी न होने पर हाईकोर्ट नाराज, कहा- यह बेहद दुखद स्थिति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय बेटी के लापता होने के करीब एक माह बाद भी पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय बेटी के लापता होने के करीब एक माह बाद भी पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि एक नाबालिग लड़की 26 मई 2026 से कथित रूप से अवैध हिरासत में है। उसके पिता की ओर से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद पुलिस अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी। यह बेहद दुखद स्थिति है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक को वर्चुअल माध्यम से पेश होने के लिए कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने दिया है।
हमीरपुर निवासी नाबालिग और उसके पिता की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई है। याची अधिवक्ता कोर्ट को बताया कि नाबालिग 26 मई से लापता है। याची को जानकारी मिली कि उसकी बेटी को हमीरपुर के राठ क्षेत्र में प्रतिवादी संख्या-4 ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। इस सूचना के आधार पर याची ने 28 मई 2026 को कोतवाली राठ के थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर बेटी को मुक्त कराने की मांग की थी।
संबंधित अधिकारियों को भी पंजीकृत डाक के माध्यम से शिकायत भेजी गई, लेकिन पुलिस प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पुलिस की कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नाबालिग की बरामदगी के लिए पिता की ओर से किए गए प्रयासों के बावजूद पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई न किया जाना चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक को सभी अभिलेखों और आवश्यक सूचनाओं के साथ 25 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।