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हाईकोर्ट : अदालतें शॉपिंग फोरम नहीं जो एक ही मामले में बार-बार याचिकाएं दाखिल की जाएं
Fri, 03 Nov 2023 01:57 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Nov 2023 01:57 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि इसे रोका जाना जरूरी है। क्योंकि, एक ही मामले से कार्रवाई से बचने के लिए भ्रामक बयान देकर, भौतिक तथ्यों को दबाकर विभिन्न न्यायिक मंचों पर असंगत आदेशों की मांग नहीं की जा सकती है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने अलीगढ़ के बंटी शर्मा उर्फ ब्रह्म प्रकाश शर्मा की अग्रिम जमानत पर सुनवाई करते हुए की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ के हरदुआगंज थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में याची की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की है। कहा कि अदालतें कोई शॉपिंग फोरम नहीं हैं, जो एक ही मामले में बार-बार याचिकाएं दाखिल की जाएं। कोर्ट ने कहा कि इसे रोका जाना जरूरी है। क्योंकि, एक ही मामले से कार्रवाई से बचने के लिए भ्रामक बयान देकर, भौतिक तथ्यों को दबाकर विभिन्न न्यायिक मंचों पर असंगत आदेशों की मांग नहीं की जा सकती है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने अलीगढ़ के बंटी शर्मा उर्फ ब्रह्म प्रकाश शर्मा की अग्रिम जमानत पर सुनवाई करते हुए की।
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कोर्ट ने कहा कि याची ने एक ही मामले में आरोप पत्र दाखिल होने और न्यायिक मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के बाद इस अदालत के समक्ष तीन बार दंड प्रक्रिया संहिता के तहत याचिकाएं दाखिल कीं। उसे राहत नहीं मिली। उसे नियमित जमानत लेने का निर्देश दिया गया। उसने नियमित जमानत की अर्जी निचली अदालत में फाइल की। नियमित जमानत पर सुनवाई नहीं हो सकी तो उसने अग्रिम जमानत अर्जी फाइल कर दी।
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निचली अदालत ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद वह हाईकोर्ट आया है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का शुद्ध दुरुपयोग है। इसे रोका जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यह टिपणियां पक्षों द्वारा लाए गए तथ्यों तक ही सीमित हैं और उक्त टिप्पणियों का परीक्षण के दौरान मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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