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High Court : मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के क्रियान्वयन पर प्रमुख सचिव और डीएम से जवाब मांगा

Fri, 22 May 2026 06:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 May 2026 06:33 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के क्रियान्वयन में देरी और दावों के यांत्रिक तरीके से खारिज किए जाने पर नाराजगी जताई है।

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High Court Chief Secretary and DM asked reply on implementation of Chief Minister Krishak Accident Welfare
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के क्रियान्वयन में देरी और दावों के यांत्रिक तरीके से खारिज किए जाने पर नाराजगी जताई है। इसे जिलास्तर पर योजना के क्रियान्वयन में गंभीर प्रशासनिक विफलता मानते हुए प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव राजस्व और कौशाम्बी के डीएम से जवाब मांगा है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनीता देवी की याचिका पर दिया। याची ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत आवेदन किया था पर निस्तारण नहीं किया गया। प्रतिदिन ऐसी रिट याचिकाएं दाखिल हो रही हैं, जिनमें केवल मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत दिए गए आवेदन के निस्तारण में देरी या लंबित रखने की शिकायत होती है। इससे स्पष्ट है कि योजना के संचालन और निगरानी में गंभीर खामियां हैं।
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कोर्ट ने कहा कि यह योजना दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से बनाई गई है। ऐसे में दावों के निस्तारण में देरी योजना के मानवीय उद्देश्य को ही विफल कर देती है। कई मामलों में डीएम और अन्य अधिकारी कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद अपने पूर्व आदेशों पर पुनर्विचार कर भुगतान जारी कर देते हैं। इससे प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि दावे बिना समुचित विचार के या बेहद लापरवाही से खारिज किए गए थे।
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कोर्ट ने कहा कि यह समस्या अब केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन और निगरानी में व्यापक संस्थागत विफलता को दर्शाती है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व से पूछा है कि योजना के दावों की निगरानी के लिए वर्तमान में क्या व्यवस्था है। जिला स्तर पर लगातार देरी और यांत्रिक अस्वीकृति के क्या कारण हैं। पूरे प्रदेश में योजना के मानवीय और समान क्रियान्वयन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और पात्र लाभार्थियों को समय पर राहत दिलाने के लिए आगे क्या सुधारात्मक उपाय प्रस्तावित हैं। अगली सुनवाई 27 मई को होगी। 

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