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हाईकोर्ट : सहायक चकबंदी अधिकारी के पुनरीक्षण आदेश को किया रद्द
Fri, 21 Jan 2022 09:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Jan 2022 09:38 PM IST
सार
सहायक चकबंदी अधिकारी मुजफ्फरनगर ने 2012 में हुई चकबंदी के दौरान याची की गांव की सड़क किनारे स्थित भूमि को अपने नौ जनवरी 2016 के पुनरीक्षण आदेश के तहत याची के प्लाट को प्रतिवादी संख्या दो के खाते में आदेशित कर दिया।
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मुकदमा
- फोटो : demo pic
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चक आवंटन के मामले में सहायक चकबंदी अधिकारी के पुनरीक्षण आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही पुराने आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से 26 मई 1981 को जारी अधिसूचना और जोत चकबंदी अधिनियम 1953 में सभी गांवों में मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय एवं प्रांतीय मार्गों या किसी अन्य सड़क पर स्थित भूमि को चक आवंटन कार्यवाही से बाहर रखने का उल्लेख है, लेकिन सहायक चकबंदी अधिकारी ने इस बात का ध्यान नहीं रखा और फैसला एकतरफा कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने मुजफ्फरनगर के ओम पाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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सहायक चकबंदी अधिकारी मुजफ्फरनगर ने 2012 में हुई चकबंदी के दौरान याची की गांव की सड़क किनारे स्थित भूमि को अपने नौ जनवरी 2016 के पुनरीक्षण आदेश के तहत याची के प्लाट को प्रतिवादी संख्या दो के खाते में आदेशित कर दिया। इससे याची सड़क किनारे स्थित भूमि से वंचित हो गया। याची ने सहायक चकबंदी अधिकारी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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