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हाईकोर्ट : भाई की हत्या के मामले में भाइयों की उम्रकैद की सजा बरकरार

Mon, 22 Aug 2022 09:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 22 Aug 2022 09:40 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो शिकायत दर्ज कराई थी। तथ्यों और परिस्थितियों की श्रृंखला से यह बखूबी साबित होता है कि निचली अदालत से दोषी करार देने वालों ने ही घटना को अंजाम दिया। उनकी निशानदेही के आधारपर हीपिस्टल की बरामदगी हुई।

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High Court: Brothers life sentence upheld in brother's murder case
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

मुरादाबाद के कोतवाली थाने में 15 साल पहले हुई भाई की हत्या में भाई पवन और चचेरे भाई अमित को तगड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में कोई गड़बड़ी नहीं है। निचली अदालत का आजीवन कारावास की सजा का दिया गया फैसला सही है। लिहाजा, उसमें छेड़छाड़ की जरूरत नहीं है। पवन और अमित कुमार की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिका पर दो जजों की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी।

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कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो शिकायत दर्ज कराई थी। तथ्यों और परिस्थितियों की श्रृंखला से यह बखूबी साबित होता है कि निचली अदालत से दोषी करार देने वालों ने ही घटना को अंजाम दिया। उनकी निशानदेही के आधारपर हीपिस्टल की बरामदगी हुई।
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मामले में पिता राजाराम ने नौ अगस्त 2007 को इस बात की प्राथमिकी कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी कि बड़ा बेटा पवन, भतीजा अमित सुभाष के साथ आए और उसे धमकाने लगे। इतने में उसका छोटा बेटा आमोद दुकान बंद करके घर वापस आ गया। उसे देख पवन और अमित ने उस फायरिंग कर दी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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उसकी मौत हो गई। निचली अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए याचियों को आजीवन कारावास और विभिन्न धाराओं में कुल 31 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। दोनों आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

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