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अदालतों की सुरक्षा में कोताही पर हाईकोर्ट सख्त

Sat, 16 Jul 2016 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 16 Jul 2016 01:40 AM IST
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High Court bestowed on the strict protection of the courts
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
हाईकोर्ट सहित जिला अदालतों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं बढ़ाए जाने के कार्य में सरकार की ओर से की जा रही कोताही पर हाईकोर्ट ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी बार-बार में अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करते हैं। हर बार काम समय पर पूरा करने का आश्वासन दिया जाता है और फिर और समय बढ़ाने की मांग की जाती है। सरकार ऐसे लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। अदालत ने कहा कि तय समयावधि में काम पूरा करने में क्या परेशानी आ रही है यह बताने के लिए अगली तारीख पर मुख्य सचिव स्वयं कोर्ट में हाजिर रहें। अन्य कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों और प्रमुख सचिव जनकार्य विभाग को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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अदालतों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के मामले में सात जजों की वृहद पीठ सरकार के रवैये से खासी नाराज थी। जजों ने कहा कि यहां बैठ कर सिविल वर्क और सिक्योरिटी देखना उनका काम नहीं है, यह सरकार का काम है, उनको इसकी चिंता होनी चाहिए, मगर उनका काम अदालत को करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट की सुरक्षा के लिए चारों गेट पर चेेक प्वाइंट बनाने और बायोमैट्रिक कार्ड से इंट्री के लिए उपकरण आदि लगाने के कार्य की अंतिम तिथि 13 मार्च को दी गई थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि गेट संख्या चार और पांच का सिविल कार्य पूरा होने और सुरक्षा उपकरण लगाने में चार माह का और समय चाहिए। बायोमैट्रिक कार्ड आदि उपकरणों के लिए टेंडर आज (15 जुलाई को) खुलना है। इसके बाद कार्य तेजी से किया जाएगा। हाईकोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों के काम न करने की शिकायत पर भी अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि 62 जिला अदालतों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। अदालतों में चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति के लिए अलग फीडर देने का काम भी प्रगति पर है। यह सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इलाहाबाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वाती की अदालत में मारपीट करने के आरोपी वकीलों राजेश मिश्र और शैलेश मिश्र को अदालत ने अवमानना के आरोप से बरी कर दिया है। एसएसपी ने इनके बारे में रिपोर्ट दी है कि घटना के समय दोनों अदालत परिसर में मौजूद नहीं थे। याचिका पर अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुल्जिमोें की पेशी अदालत के समक्ष कराने की सुविधा में कोर्ट ने रिकार्डिंग न रख पाने पर नाराजगी जताई है। कहा कि तमाम ऐसे मामले सामने आ रहा है जिसमें मुल्जिमों का आरोप है कि उनकी वीडियो कांफ्रें सिंग कराई ही नहीं गई। झूठी रिपोर्ट दी गई है। ऐसी स्थिति में साक्ष्य के तौर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की रिकार्डिंग होनी जरूरी है मगर पुलिस के पास रिकार्डिंग रखने की कोई सुविधा नहीं है। आदेश दिया है कि शीघ्र ही ऐसा बंदोबस्त किया जाए, जिससे रिकार्डिंग लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सके। 
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