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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court asked: How did the MLA who was present in the Assembly become the main accused of gang rape

हाईकोर्ट ने पूछा : विधानसभा में मौजूद रहे विधायक कैसे बने सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपी, विवेचक से जवाब तलब

Sat, 03 Aug 2024 05:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 03 Aug 2024 05:02 AM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने सह-आरोपी प्रमोद यादव व एक अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों सामूहिक दुष्कर्म और दलित उत्पीड़न मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है।

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High Court asked: How did the MLA who was present in the Assembly become the main accused of gang rape
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा पुलिस से पूछा है कि सपा के तत्कालीन विधायक रामेश्वर सिंह यादव को सामूहिक दुष्कर्म का मुख्य आरोपी कैसे बनाया गया। जबकि वह घटना के वक्त विधान सभा में मौजूद थे। कोर्ट ने विवेचक से जवाबी हलफनामा तलब करते हुए सह-आरोपी प्रमोद यादव व एक अन्य आरोपी के खिलाफ किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने सह-आरोपी प्रमोद यादव व एक अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों सामूहिक दुष्कर्म और दलित उत्पीड़न मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। जबकि, मामले के मुख्य आरोपी अलीगंज से सपा के तत्कालीन विधायक रामेश्वर सिंह यादव इस मामले में जेल काट रहे है। वहीं, इनके भाई एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव को जमानत मिल चुकी है।

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सात साल पुराने मामले में विधायक के भाई भी बनाए गए हैं आरोपी

मामला एटा जिले के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र का है। सात नवबंर 2023 को पीड़िता ने सात साल पुरानी वर्ष 2016 की घटना को लेकर अलीगंज के तत्कालीन सपा विधायक रामेश्वर सिंह यादव और उनके सगे भाई व एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव समेत सात अन्य प्रमोद यादव, सुबोध यादव, विनोद यादव, नीलू गुप्ता और राम खिलाड़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

आरोप लगाया था कि रामेश्वर और जुगेंद्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया जबकि अन्य पांचो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की थी। घटना के वक्त वह नाबालिग थी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर 20 दिसंबर 2023 को पूर्व विधायक रामेश्वर और भाई जुगेंद्र के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म,पॉक्सो अधिनियम और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं में बातौर मुख्य आरोपी, आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जबकि, शेष आरोपियों के खिलाफ विवेचना प्रचलित है। इसी बीच सह-आरोपी प्रमोद यादव और एक अन्य ने एफआईआर को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी की मांग के साथ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

वकील कर दलील

याचीयों के अधिवक्ता मनीष तिवारी ने दलील दी कि कथित घटना 29.1.2016 की सुबह 9:30 की बताई गई है। जबकि, वह घटना के समय तत्कालीन विधायक रामेश्वर सिंह यादव विधान सभा के सत्र में मौजूद थे। लखनऊ से एटा की दूरी करीब 370 किलोमीटर है। ऐसे में मुख्य आरोपी विधायक के लिए घटना को अंजाम देने के बाद उसी समय 9:30 बजे लखनऊ पहुंचना शारीरिक रूप से संभव नहीं है। सगे छोटे भाई की मौजूदगी में दुष्कर्म जैसे घृणित अपराध को अंजाम दिये जाने की घटना अविश्वसनीय है। याचियों को सात साल पुरानी घटना का हवाला देते हुए रंजिशन फंसाया गया है।

बहस के दौरान विधायक की विधान सभा में मौजूदगी से जुड़े साक्ष्य भी पेश किये गये। इससे हैरान कोर्ट ने विवेचना अधिकारी से 14 अगस्त तक जवाबी हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि घटना के वक्त विधान सभा में मौजूद थे, तो

यह निष्कर्ष कैसे निकाला गया कि वह घटना की तारीख और समय पर एटा में मौजूद थे। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख नियत करते हुए याचीयों के खिलाफ अगली तारीख तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है।

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