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High Court News : कोर्ट ने पूछा- डीएम फतेहपुर बताएं... मौका मुआयना के दौरान मृतक कैसे मौजूद था?

Sat, 26 Apr 2025 12:09 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Apr 2025 12:09 PM IST
सार

हाईकोर्ट इलाहाबाद में एक अजीबोगरीब मुकदमे की सुनवाई हुई। एक मामले में डीएम की ओर से जिसे 2024 में गवाह बताया गया उसकी मृत्यु 2011 में ही हो चुकी थी। याची की ओर से आपत्ति करने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने पर हैरान हाईकोर्ट ने डीएम फतेहपुर से पूछा कि जिसकी मृत्यु 10 साल पहले हो गई थी वह 2024 में निरीक्षण के दौरान कैसे मौके पर मौजूद था। इस मामले में कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। 

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High Court asked- DM Fatehpur should tell... how was the deceased present during the spot inspection
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में डीएम फतेहपुर ने मृतक को सरकारी जमीन के निरीक्षण का गवाह बता हलफनामा दाखिल किया है। इससे हैरान कोर्ट ने डीएम से सात मई तक स्पष्टीकरण तलब किया है। पूछा है कि मौका मुआयना के दौरान मृतक कैसे मौजूद था? मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत कर रही है।

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याची जगदीश शरण सिंह ने मंझनपुर गांव के तालाब की जमीन पर अतिक्रमण के आरोप में लगाये गये जुर्माने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दावा है कि उसने किसी भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया है। वहीं, जिन लोगों ने अतिक्रमण किया है, उन पर प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा। जबकि, डीएम फतेहपुर ने हलफनामे संग खागा तहसील के लेखपाल की 26 अक्तूबर 2024 की मुआयना रिपोर्ट दाखिल की है। बताया कि गवाह छेदीलाल और मिथुन की मौजूदगी में हुए मौका मुआयना में पाया गया है कि याची ने सरकारी तालाब की जमीन पर कब्जा कर रखा है।
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जवाब में याची के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने कोर्ट में छेदीलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल किया है। बताया कि डीएम जिस छेदीलाल को गवाह बता रहे हैं, उसकी मौत 20 अप्रैल 2011 को हो चुकी है। वहीं, दूसरा गवाह मिथुन सिंह मंझनपुर गांव का निवासी ही नहीं है। इस खुलासे के बाद अदालत ने हैरानी जताते हुए डीएम और लेखपाल से मुआयना रिपोर्ट तैयार की प्रक्रिया से जुड़ी सभी जानकारियां तलब की हैं।
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सरकारी तंत्र की ईमानदारी और जवाबदेही पर सवाल : हाईकोर्ट

यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी तंत्र की ईमानदारी और जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रहा है। मृत व्यक्ति को भूमि निरीक्षण का गवाह बनाकर दर्शाना, सरकारी व्यवस्था में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार और कागजी हेरफेर का प्रमाण है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट




 

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