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हाईकोर्ट :पिता नहीं नाना के पास ही रहेगा अंशुमान
Wed, 17 Jun 2020 07:47 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 17 Jun 2020 07:47 PM IST
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Allahabad High Court
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नाना पर अपने बेटे को जबरदस्ती अपनी अभिरक्षा में रखने का आरोप लगाने वाले पिता की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के आदेश पर नाबालिग अंशुमान को कानपुर पुलिस की सुरक्षा में बुधवार को हाईकोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसके मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान को पढ़ा और बच्चे को देखने तथा बात करने के बाद यह निर्णय लिया कि उसे नाना की अभिरक्षा में रखना ही उचित होगा।
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पिता मधुसूदन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुनवाई की। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कांत व अरविंद कुमार ने पक्ष रखा तथा पुलिस की सुरक्षा में लाए गए नाबालिग अंशुमान को कोर्ट में हाजिर कराया । याचिका में पिता ने आरोप लगाया था कि उसके नाबालिग बेटे को उसके नाना ने जबरदस्ती अपने पास रखा है और उससे मिलने नहीं दे रहे हैं।
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इस आरोप पर हाईकोर्ट ने बेटे अंशुमान को 17 जून को पूरी सुरक्षा के साथ दो बजे कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने एसएसपी एवं सीएमओ कानपुर नगर को आदेश दिया था कि नाबालिग बच्चे को कानपुर से इलाहाबाद आते व वापस जाते समय यह सुनिश्चित करें कि उसे कोई इन्फेक्शन या बीमारी न होने पाए।
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कोर्ट ने इस पर आने वाले खर्च के लिए याची पिता को 15 जून तक महानिबंधक के समक्ष 15 हजार रुपये नकद जमा करने का निर्देश भी दिया था। याची का कहना था कि उसके बेटे अंशुमान सचान को नाना प्रमोद सचान ने जबरन निरुद्ध कर लिया है। उनसे मुक्त कराकर याची को अभिरक्षा सौंपी जाए।
कोर्ट ने आठ जून को एसएसपी कानपुर नगर को अंशुमान को चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने और मजिस्ट्रेट को उसका बयान दर्ज कर प्रेषित करने को कहा था। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान को देखने व लड़के की बात सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी । अंशुमान अपने नाना के साथ कानपुर नगर के सजेती थाना क्षेत्र के बरीपाल गाव में रह रहा है।