फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Hearing of seven judges on various issues including facilities to subordinate courts

HC: सात जजों की वृहदपीठ ने सरकार से मांगा जवाब, जांच और कानून व्यवस्था के लिए अलग पुलिस क्यों नहीं

Sat, 08 Dec 2018 01:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Sat, 08 Dec 2018 01:26 AM IST
विज्ञापन
Hearing of seven judges on various issues including facilities to subordinate courts
Allahabad High Court

हाईकोर्ट के सात जजों की वृहदपीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि सूबे में आपराधिक मुकदमों की जांच और कानून व्यवस्था के लिए अलग अलग पुलिस क्यों नहीं हो सकती है। वृहदपीठ ने ग्राम अदालतों सहित अधीनस्थ न्यायालयों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न कराए जाने पर नाराजगी भी जताई है। सरकार से पूछा है कि अदालतों को सुविधाएं देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

विज्ञापन


वृहदपीठ में मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति विक्रमनाथ, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति भारती सप्रू, न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायालय बीके नारायण सुनवाई कर रहे हैं। वृहदपीठ में सीतापुर में वकीलों के उत्पीड़न और हड़ताल के मुद्दे को भी संज्ञान में लिया। कहा गया कि वकीलों को हड़ताल करने का कानूनी अधिकार नहीं है, इसके बावजूद हड़ताल की जा रही है। पुलिस कानून व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। वकीलों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि मुकदमों की विवेचना और कानून व्यवस्था के लिए अलग अलग पुलिस होनी चाहिए। ठीक तरीके से विवेचना नहीं होने से न्याय देने में दिक्कत आ रही है। कोर्ट ने अभियोजन के लिए एक निगरानी तंत्र विकसित करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सरकार छोटे छोटे मामलों में भी अपील दाखिल कर मुकदमों का बोझ बढ़ा रही है। इस संबंध में मुकदमा नीति का पालन किया जाना चाहिए। सरकार मुकदमों का बोझ करने में सहयोग नहीं कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्राम न्यायालयों के गठन पर जस्टिस अग्रवाल का कहना था कि एक्ट 2008 में बन गया, मगर सरकार इसे सिर्फ कागजों पर चला रही है। लोगों को उनके दरवाजे पर न्याय देने की परिकल्पना को अंजाम देने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया। जजों और उनके लिए स्टॉफ की कमी का मुद्दा भी वृहदपीठ ने उठाया। 2500 जजों पर 1900 स्टेनो हैं। हालत यह है कि कई जज खुद फैसले लिख रहे हैं। जजों के बैठने के लिए कमरे तक नहीं हैं। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी को अगली सुनवाई पर सरकार द्वारा उठाए कदमों की जानकारी देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 11 जनवरी को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed