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Flood : कछारी इलाके में बढ़ा बाढ़ का खतरा, कई गांव चपेट में, लगाई गईं नौकाएं; तस्वीरें

Sat, 20 Aug 2022 11:11 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 20 Aug 2022 11:11 AM IST
सार

गंगा और यमुना नदी के जलस्तर में बृहस्पतिवार शाम से तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई जो शुक्रवार दिन में भी जारी रही। शाम को इसमें कमी आई लेकिन खतरा बना हुआ है। बदरा सोनौटी के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी में घिर गए हैं। इसकी वजह से इन गांव के लोगों का अन्य स्थानों से संपर्क टूट गया है।

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Ganga and Yamuna river water has started filling in the low-lying areas of Prayagraj, people started moving to
Prayagraj News : तेजी से बढ़ रहा है गंगा और यमुना का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला।

गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी की वजह से तट के किनारे बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं तथा सड़कें डूब जाने से उनका संपर्क टूट गया है। वहीं शहरी क्षेत्र के कछारी इलाके में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो शनिवार तक इन बस्तियों में पानी घुसने का अंदेशा बन गया है।



गंगा और यमुना नदी के जलस्तर में बृहस्पतिवार शाम से तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई जो शुक्रवार दिन में भी जारी रही। शाम को इसमें कमी आई लेकिन खतरा बना हुआ है। बदरा सोनौटी के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी में घिर गए हैं। इसकी वजह से इन गांव के लोगों का अन्य स्थानों से संपर्क टूट गया है।

वहीं शहरी क्षेत्र के बघाड़ा, सलोरी, बेली आदि कछारी इलाके में गंगा का पानी बस्तियों के कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहने पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से भी बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में 10 आश्रय स्थल सक्रिय कर दिए गए हैं। हालांकि, देर रात तक कोई भी इन शिविरों में नहीं पहुंचा था।

बड़े हनुमान मंदिर परिसर भी जलमग्न 
गंगा-यमुना के जलस्तर में शुक्रवार की देर रात तेज वृद्धि से तटीय इलाकों में लोगों की नींद उड़ी रही।बड़े हनुमान मंदिर परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया। मंदिर के बाहर गंगा की लहरों के पास भक्त पूजा-आरती करते रहे।  इस दिन गंगा आरती बांध पर हुई। 

जलस्तर
गंगा
फाफामऊ- 82.27 मीटर
छतनाग- 81.50 मीटर

यमुना
नैनी- 82.15 मीटर

Ganga and Yamuna river water has started filling in the low-lying areas of Prayagraj, people started moving to
Prayagraj News : तेजी से बढ़ रहा है गंगा यमुना का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला।

एनडीआरएफ की टीम तैनात
बाढ़ की आशंका को देखते हुए एनडीआरएफ की दो टीमें लगाई गईं हैं। टीम के सदस्य इन इलाकों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। जिला प्रशासन, सिंचाई समेत अन्य विभागों के अफसरों एवं कर्मचारियों की टीम भी निचले इलाकों पर लगातार नजर रख रही है।

इनके अलावा नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्यों की भी प्रभावित क्षेत्रों तथा आश्रय स्थलों पर ड्यूटी लगाई गई है। कोर के रवि शंकर द्विवेदी, आईसीयू मार्कंडेय, सुनील गुप्ता आदि ने इलाकों का सर्वे भी किया। बाढ़ से प्रभावित बदरा सोनौटी समेत अन्य इलाकों में नावें लगाई गईं हैं। अभी बाढ़ का खतरा तो नहीं है लेकिन सोरांव में भी आठ नावें लगा दी गईं हैं।

Ganga and Yamuna river water has started filling in the low-lying areas of Prayagraj, people started moving to
Prayagraj News : शहर की बस्तियों में घुसा बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला।

झूंसी के कछारी गांवों में घुसा पानी, मचा हड़कंप
गंगा एवं यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने झूंसी के तटवर्ती इलाकों समेत कछारी गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। शुक्रवार की सुबह बाढ़ के पानी ने झूंसी के बदरा-सोनौटी मार्ग को चपेट में ले लिया। इससे दर्जनों कछारी गांव का संपर्क टूट गया।

बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, मदारपुर, पैगंबरपुर समेत एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की पानी में घिर गए हैं। बदरा-सोनौटी मार्ग पर चार पहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप्प पड़ गई। किसी तरह ग्रामीण अपने दो पहिया वाहनों से जान जोखिम में डालकर आवागमन करते रहे।

ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से तीन छोटी नावें चलाई गईं हैं। शनिवार से बड़ी नाव चलाने की बात कही जा रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने से बाढ़ की चपेट में कई अन्य इलाकों के आने का भी अंदेशा बना हुआ है। कछारी तथा निचले इलाके में बडे़ स्तर पर सब्जी की खेती होती है लेकिन बाढ़ की चपेट में आने से फसल बर्बाद हो गई है।

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Ganga and Yamuna river water has started filling in the low-lying areas of Prayagraj, people started moving to
Prayagraj News : शहर की बस्तियों में घुसा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

सात साल पहले भी बाढ़ ने मचाई थी तबाही
शुक्रवार की सुबह जब झूंसी के एक दर्जन कछारी गांवों बाढ़ का पानी घुसा तो ग्रामीणों को सात साल पहले की तबाही का मंजर याद आ गया। अगस्त 2015 में बाढ़ ने इन गांवों में तबाही मचाई थी। कई मकान गिर गए थे। डूबने से दो दूधियों की मौत भी हो गई थी। यही वजह है कि बरसात के मौसम में तटवर्ती गांव के ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों पर चले जाते हैं।

बदरा-सोनौटी गांव के राम प्रताप यादव का कहना है कि हर साल बाढ़ के कारण कछारी गांवों के लोगों को परेशान होना पड़ता है। यह मुसीबत सप्ताह भर से पहले कम नहीं होगी। अभी तो बिजली आपूर्ति ठप्प होगी तो समस्या और बढ़ जाएगी। राम प्रताप ने गांव में जनरेटर लगाए जाने की मांग की है।

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Ganga and Yamuna river water has started filling in the low-lying areas of Prayagraj, people started moving to
Prayagraj News : तेजी से बढ़ रहा है गंगा और यमुना का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला।

बाढ़ प्रभावित कछारी गांव फिरोजपुर के मनोज यादव कहते हैं कि सबसे ज्यादा मुसीबत आवागमन को लेकर करनी पड़ती है। रास्ता बंद होने से परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। व्यवसाय भी प्रभातिव होता है।

मुंशी का पुरा गांव निवासी दुर्गेश पासी का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाई है। प्रशासन को जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने चाहिए। नई झूंसी निवासी देवेंद्र यादव तथा शैलेंद्र यादव का कहना है कि बाढ़ के कारण हमारी मुसीबत कई गुना बढ़ जाती है। कई दिनों तक विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है।   ो

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