{"_id":"5f8a00bc8ebc3e9bc8193deb","slug":"former-mp-umakant-yadav-and-son-s-petition-dismissed-city-desk-news-ald2891763197","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व सांसद उमाकांत यादव व बेटे की याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व सांसद उमाकांत यादव व बेटे की याचिका खारिज
Sat, 17 Oct 2020 04:23 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 04:23 PM IST
विज्ञापन
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव और उनके बेटे दिनेश यादव उर्फ सूर्यकांत को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने उन पर फर्जी बैनामे को लेकर चल रहे आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने दिया है।
उमाकांत और उनके बेटे के खिलाफ जौनपुर के शाहगंज थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्रयागराज के एमपीएमएलए कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। याची का कहना था कि बैनामे को निरस्त करने का सिविल वाद खारिज हो चुका है। उसी मामले में आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है। यह न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आपराधिक केस 2007 का है। सिविल केस 2016 का है। सिविल केस पैरवी न करने के कारण खारिज हुआ। एक ही मामले में सिविल व आपराधिक दोनों कार्यवाही चलाई जा सकती है। सह अभियुक्त दिनेश यादव भी एमएलए रहा है। इसलिए विशेष अदालत को मुकदमा सुनने का अधिकार है। याचिका में सम्मन को चुनौती न देकर मुकदमे को चुनौती दी गई है। जो सही नहीं है। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
विज्ञापन
उमाकांत और उनके बेटे के खिलाफ जौनपुर के शाहगंज थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्रयागराज के एमपीएमएलए कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। याची का कहना था कि बैनामे को निरस्त करने का सिविल वाद खारिज हो चुका है। उसी मामले में आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है। यह न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आपराधिक केस 2007 का है। सिविल केस 2016 का है। सिविल केस पैरवी न करने के कारण खारिज हुआ। एक ही मामले में सिविल व आपराधिक दोनों कार्यवाही चलाई जा सकती है। सह अभियुक्त दिनेश यादव भी एमएलए रहा है। इसलिए विशेष अदालत को मुकदमा सुनने का अधिकार है। याचिका में सम्मन को चुनौती न देकर मुकदमे को चुनौती दी गई है। जो सही नहीं है। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
विज्ञापन