High Court : छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को यूपी में दर्ज शराब घोटाला मामले में मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित 2,161 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश में दर्ज मुकदमे में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को जमानत दे दी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित 2,161 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश में दर्ज मुकदमे में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने निरंजन दास की जमानत अर्जी पर दिया। अभियोजन के अनुसार निरंजन दास छत्तीसगढ़ के आबकारी आयुक्त रहते हुए राज्य की आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार करने में शामिल थे। आरोप है कि उन्होंने ऐसी नीति बनाई जिससे नोएडा स्थित एक प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचा। इसी मामले में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के कासना थाने में भी एफआईआर दर्ज की गई है।
कथित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में पहले छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, रायपुर ने 70 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि मुख्य मामले में मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सूचना के आधार पर नोएडा में कथित होलोग्राम निर्माण को लेकर उत्तर प्रदेश में वर्तमान मुकदमा दर्ज हुआ।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने कभी कानून की प्रक्रिया से बचने, फरार होने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया हो। कोर्ट ने कहा कि मुख्य अपराध छत्तीसगढ़ में कथित रूप से हुआ। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है, उत्तर प्रदेश में जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र में 22 गवाह हैं। कोर्ट ने निरंजन दास को जमानत दे दी।