फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Forgotten the trying , the rest is just memories

बिसरा दिए गए फिराक, सिर्फ यादें ही बाकी

Sun, 28 Aug 2016 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 28 Aug 2016 02:25 AM IST
विज्ञापन
Forgotten the trying , the rest is just memories
allahabad
इलाहाबाद। ‘आने वाली नस्लें तुम पर फख्र करेंगी हमअसरो/जब उनको यह ध्यान आएगा तुमने फिराक को देखा है’ लेकिन आज फिराक के हमअसरो, आने वाली नस्लों और उनके शागिर्दों, किसी को भी फिराक की यादें सहेजने के लिए न फिक्र है न ही फुरसत। नामचीन शायर रघुपति सहाय ‘फिराक गोरखपुरी’ की जयंती पर फिर उन्हें याद किया जाएगा और उनकी यादें सहेजने के लिए संकल्प लिए जाएंगे लेकिन सच तो यह कि फिराक को विदा हुए तकरीबन 34 बरस बाद भी हम उनकी यादों को स्थायी तौर पर सहेजने के लिए कुछ भी नहीं कर सके हैं। इसके लिए न तो उस इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने पहल की, जहां उन्होंने लंबा अरसा गुजारा और न ही उनके शागिर्दों ने जिन्हें उनसे अदब और जिंदगी का हुनर सीखने का मौका मिला।
विज्ञापन

हालांकि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से रिटायर होने के बाद अंतिम दिनों तक फिराक साहब बैंक रोड वाले बंगले में ही रहे लेकिन उनके न रहने पर बैंक रोड के बंगले में रखी उनकी चीजें पहले कुछ दिनों तक एक कमरे में बंद रहीं, बाद में उन्हें विश्वविद्यालय के वीमेंस कालेज परिसर के पुराना बैंक रोड हॉस्टल के एक कमरे में रख दिया गया। फिर ये चीजें कहां गईं, किसी को नहीं पता। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पास उनकी कोई चीज सुरक्षित नहीं है। बैंक रोड वाले बंगले की तो सूरत ही बदल गई है। परिसर में बनी खपरैल की कुटिया जाने कब बारिश में ढह गई, जहां वह बरसात के दिनों में बैठकर लोगों से मिलते थे। फिलहाल उस बंगले को टुकड़ों में बांटकर शिक्षकों के लिए आवास बना दिए गए।
विज्ञापन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एए फातमी कहते हैं, यह हमारी बदनसीबी है कि हम उनकी कोई चीज सहेज कर नहीं रख सके हैं। फिराक साहब की चीजें कहां बिखर गईं, कोई नहीं जानता। यहां तक कि विश्वविद्यालय के कैलेंडर में भी उनकी तस्वीर नहीं शामिल की गई है। वाइस चांसलर सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के कार्यकाल में निराला और फिराक की प्रतिमाएं लगाने के लिए प्रस्ताव पास हुआ था। इसमें से पुस्तकालय के सामने निराला की प्रतिमा तो लग गई लेकिन फिराक का मुद्दा जाने कहां गुम हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


जयंती पर सहेजी जाएंगी फ़िराक की यादें
 संगोष्ठी, गज़ल के अतिरिक्त दिखाई जाएगी डाक्यूमेंट्री
इलाहाबाद। जोश व फिराक लिटरेरी सोसाइटी की ओर से मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी की जयंती पर 28 अगस्त को शाम चार बजे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय विस्तार केंद्र में ‘याद-ए-फ़िराक़ गोरखपुरी’ के तहत उनकी यादें सहेजी जाएंगी। सोसाइटी के महासचिव एए फातमी के मुताबिक इस मौके पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता इतिहासकार प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा करेंगे जबकि वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय मुख्य वक्ता होंगे। दूसरे चरण में प्रोफेसर स्मिता अग्रवाल फ़िराक़ की गजलें पेश करेंगी।

इसी क्रम में इलाहाबाद संग्रहालय में भी ‘दास्ताने फ़िराक़’ के तहत रविवार को दोपहर बारह बजे फ़िराक़ पर तैयार डाक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित की देखरेख में बनी तकरीबन पंद्रह मिनट की डाक्यूमेंट्री में अनेक बुद्धिजीवियों, रचनाकारों के फ़िराक़ से जुड़े संस्मरण शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed