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पहले हम साथ-साथ, अब जानी दुश्मन

Wed, 02 Mar 2016 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 02 Mar 2016 01:46 AM IST
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First , along with bitter enemies now

कहने को तो ये फिल्मों के नाम हैं, लेकिन इन दिनों युवाओं के बीच बनने वाले रिश्तों पर ऐसा ही प्रभाव पड़ रहा है। युवामन पहले सामाजिक बंदिशों को दरकिनार कर साथ-साथ रहते हैं, फिर अचानक जानी दुश्मन बन जाते हैं और मामला थाने फिर कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाता है। शहर में लिव इन रिलेशनशिप के जो मामले सामने आए हैं, उनमें प्रेम और रिश्तों का मखौल उड़ता साफ दिखता है। 

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एक-दूसरे पर जान छिड़कने वाले, लोगों और घरवालों के तानों की परवाह करे बिना साथ रहने वाले युवक-युवती अचानक दुश्मन बन जाते हैं। प्यार का रिश्ता मतलबी बन जाता है और चाहत नफरत में तब्दील हो रही है।  संगम नगरी जैसे परंपरावादी शहर में पैठ बना रहा लिव इन रिलेशनशिप का काला पक्ष अब साफ दिखने लगा है। इससे पहले कि ये जोड़े शादी के बंधन में बंध पाते, इनका एक-दूजे से मोहभंग हो गया। लिव इन रिलेशनशिप के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें लड़कियां लड़कों के साथ कुछ समय तक रिलेशन में रहीं और फिर लड़कों पर रेप का केस दर्ज करा दिया। 

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काउंसलर प्रतिभा मिश्रा कहती हैं कि आज युवा पीढ़ी को किसी भी तरह का बंधन बर्दाश्त नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में वैवाह संस्कार में जटिलताएं जिस तरह बढ़ी हैं, उससे भी शादी को लेकर युवाओं में मोहभंग हुआ है। इसके साथ ही पाश्चात्य संस्कृति के नक्शेकदम पर चल युवा लिव इन रिलेशन की ओर आकर्षित हुए हैं। क्योंकि इसमें न तो किसी तरह का कोई कमिटमेंट है और कोई कानूनी लिखा-पढ़ी। जब तक चाहो साथ रहो और मन भर जाने पर अलग हो जाओ।

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लिव इन रिलेशन के जो मामले आ रहे हैं उनमें रिश्ते में प्यार के साथ ही बजट भी इसकी वजह है। दूसरे शहरों से आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को एक साथ रहने का तो मौका मिलता ही है साथ ही बजट का बंटवारा भी होता है। एक साथ रहने से घर, खाने पीने समेत सभी खर्च भी साझा हो जाते हैं। जिससे किसी एक पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है।


समाजशास्त्री डॉ. विनीता अग्रवाल कहती हैं कि लिव इन रिलेशनशिप हमारी संस्कृति का हिस्सा ही नहीं है। आज जिस तरह से लिव इन रिलेशनशिप बढ़ रहा है वह समाज के लिए घातक है। समाज में रिश्तों और शादी के मायने ही खत्म हो रहे हैं। रिश्ता वहीं सफल होता है जिसमें सम्मान और जिम्मेदारी होती है। लिव इन में यह दोनों ही नहीं है। ऐसे में इन रिश्तों का तो यह अंजाम होना ही है। इस तरह के मामलों में तो लड़कियों को खास तौर से संभल कर रहना चाहिए। कॉलेज और उच्च शिक्षा हासिल करते वक्त उन्हें दिल से ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि चीजें जब हाथ से निकल जाती हैं तो कुछ भी हासिल नहीं होता। इसके साथ ही अभिभावकों को भी अपने बेटियों को सही और गलत के अंतर को सिखाना चाहिए।  


कौशांबी की रश्मि और मध्य प्रदेश के नितिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इलाहाबाद आए। रश्मि ने बैरहना और नितिन ने अल्लापुर में कमरा लिया था। दोनों की मुलाकात कोचिंग के दौरान हुई। जहां उनकी मोहब्बत परवान चढ़ी। दोनों ने एक साथ रहने का फैसला लिया। खर्च भी दोनों ने आधा-आधा बांटा लिया। जिससे किसी एक पर भार न पड़े। तीन साल तक सब ठीक रहा लेकिन नितिन के प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के बाद हालात बदल गये। नितिन ने रश्मि से रिश्ता खत्म करने को कहा, मगर रश्मि इसके लिए तैयार नहीं थी। झगड़े बढ़ने लगे और अंत में रश्मि ने नितिन पर रेप का केस दर्ज कराया है। खास यह कि रश्मि ने इस बारे में अपने परिवार को नहीं बताया है।


चार साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद सुमित और मनीषा का एक माह पहले ब्रेकअप हो गया। लिव इन के दौरान महिमा ने एक बच्ची को जन्म दिया। महिमा का आरोप है कि सुमित ने उसे शादी का भरोसा दिया था लेकिन बेटी होने के बाद वह शादी से मुकर गया। सुमित  घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होने का हवाला देकर उसे और बेटी को अपनाने से साफ इंकार कर दिया। युवती ने करेली थाने में तहरीर देकर सुमित के खिलाफ रेप का मुकदमा लिखवाया। उसका कहना है कि सुमित जब बेटी होने के बाद अपनी जिम्मेदारियों से मुकर गया ऐसे वह दूसरे रिश्ते में बंधने के लायक भी नहीं है। (पहचान निभाने के लिए नाम बदले गए हैं)

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