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निजी हित के लिए जनहित याचिका दाखिल करने पर पचास हजार हर्जाना
Mon, 08 Feb 2021 08:09 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 08 Feb 2021 08:09 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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निजी लाभ के लिए जनहित याचिका दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची पर पचास हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने याचिका भी खारिज कर दी है। जौनपुर के मछली शहर के मजार ग्राम निवासी अफसाना की याचिका पर न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने सुनवाई की।
याची ने ग्राम पंचायत में सस्ते गल्ले के सही वितरण की मांग में यह याचिका दायर की थी। दुकान आवंटन में याची की बहू ने भी आवेदन दिया था। किंतु दुकान दूसरे को मिली। पहले के दुकानदार के पक्ष में हाईकोर्ट के यथा स्थिति आदेश के चलते आवंटन निरस्त कर दूसरी ग्राम पंचायत की दुकान से संबद्ध कर दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि जब याची दुकान पाने की इच्छुक है तो वह जनहित याचिका दाखिल नहीं कर सकती। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए याची पर पचास हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि 15 दिन में हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि जमा नहीं करती तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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याची ने ग्राम पंचायत में सस्ते गल्ले के सही वितरण की मांग में यह याचिका दायर की थी। दुकान आवंटन में याची की बहू ने भी आवेदन दिया था। किंतु दुकान दूसरे को मिली। पहले के दुकानदार के पक्ष में हाईकोर्ट के यथा स्थिति आदेश के चलते आवंटन निरस्त कर दूसरी ग्राम पंचायत की दुकान से संबद्ध कर दिया गया है।
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कोर्ट ने कहा कि जब याची दुकान पाने की इच्छुक है तो वह जनहित याचिका दाखिल नहीं कर सकती। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए याची पर पचास हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि 15 दिन में हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि जमा नहीं करती तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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