प्रयागराज : साहेब पिताजी आक्सीजन पर हैं, लाइट जुड़वाय के जान बचाय लो
कंट्रोल रूम पर रविवार को पूरे दिन फोन घनघनाते रहे। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा, वहीं कई ऐसे फोन भी आए जिससे कर्मचारियों का दिल पसीज कर रह गया।
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कंट्रोल रूम पर रविवार को पूरे दिन फोन घनघनाते रहे। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा, वहीं कई ऐसे फोन भी आए जिससे कर्मचारियों का दिल पसीज कर रह गया। कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि कई लोग फोन पर गिड़गिड़ाते नजर आए।
पुराने शहर से कई लोगों ने फोन पर रोते हुए बताया कि उनके घर में तीन दिन से बिजली नहीं आई है। घर में अब एक बूंद भी पानी नहीं बचा है, बच्चों की हालत खराब हो रही है। वहीं करेलाबाग के एक शिकायतकर्ता ने फोन पर रोते हुए कहा कि साहेब, बिजली नहीं है तीन दिन हो गए। पिताजी आक्सीजन पर रहते हैं, लाइट जुड़वाय के पिताजी की जान बचाय लो साहेब। कर्मचारी उन्हें सिवाय आश्वासन के कुछ और न दे सके।
दूसरी तरफ कई उपभोक्ताओं ने कर्मचारियों को धमकी भी दी। कर्मचारियों ने उन्हें जब बताया कि वह खुद लगातार शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं तो शिकायतकर्ताओं ने फोन पर ही गालियां और धमकियां देना शुरू कर दीं। कंट्रोल रूम पर रविवार को लगभग 11 बजे एक महिला ने फोन कर कहा, भईया मैं भी बिजली विभाग में काम करती हूं, अगर हो सके तो मेरे घर की बिजली चालू करा दीजिए। महिला को कर्मचारी ने हड़ताल का हवाला देकर कहा, मैडम कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं है। सब हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आपकी शिकायत को दर्ज करके संबंधित प्रभारी को सूचित कर दिया जा रहा है।
मिला नंबर रहा बंद, खूब झुंझलाए शहरवासी
बिजली विभाग के कंट्रोल रूम से शिकायतकर्ताओं को संबंधित क्षेत्र के प्रभारियों के नंबर दिए जा रहे थे। कहा जा रहा था कि इन प्रभारियों को अपनी समस्याएं बताएं। शिकायतकर्ताओं को कंट्रोल रूम से जो नंबर दिए गए, उनमें अधिकतर नंबर बंद मिले।
रामबाग के रहने वाले अंशुमन और इंद्रजीत ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से लगातार कंट्रोल रूम पर फोन कर रहे हैं। दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फोन लगा। इसके बाद कंट्रोल रूम से रामबाग उपकेंद्र के प्रभारी का नंबर थमाया गया। उस नंबर पर फोन लगाने पर वह बंद मिला।
46 प्रभारियों में महज दो के उठे फोन
जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त किए गए प्रभारियों का सूरते हाल यह रहा कि 46 लोगों में से केवल दो के ही फोन उठे। आठ कर्मचारी अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। 15 कर्मचारियों ने तीन-तीन बार फोन लगाए जाने के बावजूद फोन नहीं उठाया। आठ कर्मचारियों के नंबर बंद मिले और 13 कर्मचारियों के नंबर ही गलत चढ़े मिले। यह सभी कर्मचारी नगर निगम, सिंचाई विभाग, आईटीआई और पीडीए जैसे विभागों से संबंधित थे।