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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Father-in-law's life imprisonment continues in dowry murder

दहेज हत्या में ससुर देवर की उम्रकैद बरकरार

Wed, 02 Dec 2020 01:11 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Dec 2020 01:11 AM IST
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Father-in-law's life imprisonment continues in dowry murder
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला और उसके मासूम बच्चे की दहेज के लिए हत्या के मामले में ससुर और देवर को दोषी मानते हुए उनको सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना था कि इस विशेष प्रकृति के मामले में जहां अभियुक्त उसी घर में रह रहे थे जहां एक साथ दो संदिग्ध मौतें हुईं हैं। मौत का कारण न बता पाना अभियुक्तों को निर्दोष साबित नहीं करता है। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दाखिल अपील खारिज करते हुए सजा को बहाल रखा है। 

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पडरौना कुशीनगर के विश्वनाथ गुप्ता और हरेंद्र गुप्ता की अपीलें खारिज करते हुए यह निर्णय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने सुनाया। घटना की शिकायत मृतका विद्या देवी के पिता पूरनमासी ने दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक विद्या की शादी विश्वनाथ गुप्ता के लड़के अनिरुद्ध के साथ 1989 में हुई थी। शादी में साइकिल की मांग पूरी न कर पाने पर ससुराल वाले विद्या का उत्पीड़न कर रहे थे।
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जनवरी 1996 में विद्या और उसके ढाई वर्ष के पुत्र राजकुमार की संदिग्ध परिस्थितियों मेें मृत्यु हो गई। ससुराल वालों ने बिना पुलिस और मायके वालों को सूचना दिए दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। पूरनमासी को घटना की जानकारी होने पर उसने पुलिस से शिकायत की। मगर उसकी प्राथमिकी तीन माह बाद एसएसपी के निर्देश पर दर्ज हो सकी। 
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पुलिस ने इस मामले में दहेज हत्या, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। विचारण के दौरान शिकायतकर्ता पूरनमासी ने पहले तो अभियोजन का समर्थन किया मगर बाद में खुद अपने बयान से पलट गया। इसके बावजूद सेशन कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियुक्तगण उसी मकान में रहते थे जिसमें विद्या और उसके बच्चे की संदिग्ध हालत में मौत हुई। इसके बावजूद वह यह बता पाने में नाकाम हैं कि एक साथ दो मौतें कैसे हुई यह बात विश्वसनीय नहीं है। कोर्ट ने दोनों की अपीलें खारिज कर दी हैं।

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