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नकली प्लेटलेट्स केस : अस्पतालों के पैड पर बनाते थे फर्जी रेफरल लेटर, हुए कई अहम खुलासे

Sun, 23 Oct 2022 06:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 23 Oct 2022 06:19 AM IST
सार

खास बात यह कि वह इसके लिए निजी व सरकारी अस्पतालों के लेटर पैड का इस्तेमाल करते थे। यह लेटर पैड उन्हें अस्पतालों के कर्मचारियों से मिलते थे, जिससे उनकी सांठगांठ रहती थी। रुपयों का लालच देकर वह अस्पताल के कर्मचारियों को इसके लिए राजी कर लेते थे।

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Fake referral letters were made on the pads of hospitals
Prayagraj News : पुलिस के हत्थे चढ़े नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह के सदस्य। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि वह ब्लड बैंकों से प्लाज्मा लेने के लिए फर्जी रेफरल लेटर तैयार करते थे। खास बात यह कि वह इसके लिए निजी व सरकारी अस्पतालों के लेटर पैड का इस्तेमाल करते थे। यह लेटर पैड उन्हें अस्पतालों के कर्मचारियों से मिलते थे, जिससे उनकी सांठगांठ रहती थी। रुपयों का लालच देकर वह अस्पताल के कर्मचारियों को इसके लिए राजी कर लेते थे। लेटर पैड मिलने के बाद वह अस्पताल के किसी डॉक्टर का नाम लिखकर खुद ही फर्जी रेफरल लेटर तैयार कर लेते थे। 

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फर्जी तरीके से बनाए गए इसी रेफरल लेटर के जरिये गिरोह के सदस्य ब्लड बैंकों में जाकर प्लाज्मा ले लेते थे। सूत्रों का कहना है कि उनके कब्जे से शहर के कई नामी अस्पतालों के लेटर पैड मिले हैं। इनमें निजी के साथ ही सरकारी अस्पताल के भी लेटर पैड शामिल हैं। हालांकि जब पुलिस ने इन अस्पतालोें के संचालकों व अफसरों से बात की तो उन्होंने बरामद रेफरल लेटरों पर लिखे नामों वाले मरीजों के बारे में जानकारी से इंकार किया। साफ कहा कि उनके अस्पताल में कभी इस नाम का कोई मरीज भर्ती हुआ ही नहीं। 
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जानकारों का कहना है कि जांच ठीक ढंग से हुई तो गिरोह के मददगार कई अस्पताल कर्मचारी भी बेनकाब हो सकते हैं। सीओ कोतवाली सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच पड़ताल की जा रही है। 

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ब्लड बैंकों की लापरवाही का भी उठाते थे फायदा
पुलिस की जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि गिरोह के सदस्य ब्लड बैंकों की लापरवाही का भी फायदा उठाते थे। दरअसल प्लाज्मा के लिए फर्जी रेफरल लेटर बनाने के लिए वह एक और खेल करते थे। वह किसी भी अस्पताल के लेटर पैड के पर्चे पर सादा कागज रखकर फोटोकॉपी करा लेते थे। फिर इसी पर फर्जी नाम लिखकर दूसरा रेफरल लेटर बना लेते थे। जानकारों का कहना है कि नियमत: फोटोकॉपी रेफरल लेटर पर प्लाज्मा नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन लापरवाही के चलते ब्लड बैंकों की ओर से इन पर भी प्लाज्मा दे दिया जाता था। 

सभी 10 आरोपी भेजे गए जेल
नकली प्लेटलेट्स बेचकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले गिरोह के सरगना समेत सभी 10 लोग शनिवार को जेल भेज दिए गए। कोतवाली थाने में रात भर उनसे पूछताछ की जाती रही। शनिवार दोपहर बाद सभी को कोर्ट में पेश किया गया। जहां रिमांड अर्जी मंजूर होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारागार नैनी भेज दिया गया। उधर फरार सदस्यों अजय सिंह व प्रदीप मौर्य की तलाश जारी है। अजय के बारे में पता चला है कि वह छात्रों को रुपयों का लालच देकर ब्लड बैंक से प्लाज्मा लेने के लिए भेजता था। जबकि प्रदीप सरगना का सहयोगी है। 

सतीश का नहीं मिला सुराग
ग्लोबल अस्पताल में बाकराबाद बम्हरौली निवासी प्रदीप पांडेय की मौत के मामले में नामजद झलवा निवासी सतीश साहू का दूसरे दिन भी सुराग नहीं मिला। आरोप है कि सतीश ने ही मरीज के परिजनों को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए थे। आरोप यह भी है कि इसी प्लेटलेट्स को चढ़ाए जाने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। धूमनगंज इंस्पेक्टर का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है। 

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