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फर्जी लेटर हेड मामला : सचिव ने एफआईआर के लिए दी तहरीर, पुलिस ने लिखने से किया इन्कार

Sun, 24 Sep 2023 05:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 24 Sep 2023 05:00 PM IST
सार

बोर्ड सचिव के मुताबिक, कुछ अराजक तत्व लोगों को भ्रमित करते हुए ऐसा कर रहे हैं। इसमें हस्ताक्षर ही नहीं, बल्कि बोर्ड का लेटर हेड भी फर्जी लगाया जा रहा है। इसके लिए सभी जिलों को आगाह करते हुए उन्होंने लिखा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद से प्रदेश के विद्यालयों में क्लर्क या किसी अन्य पद पर नियुक्ति नहीं की जाती है।

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Fake letter head case: Secretary filed complaint for FIR, police refused to write
यूपी बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी बोर्ड के लेटर हेड पर सचिव दिव्यकांत शुक्ल के फर्जी हस्ताक्षर से जौनपुर के पब्लिक इंटर कॉलेज में एक शख्स ने क्लर्क की नौकरी हासिल कर ली। इसकी जानकारी से बोर्ड में खलबली मच गई है। बोर्ड सचिव ने नौकरी पाने वाले जौनपुर में ग्राम विरमपुर निवासी राजीव रतन सिंह के खिलाफ एफआईआर के लिए सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी है। बकौल सचिव, पुलिस ने उनकी रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया है।

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बोर्ड सचिव के मुताबिक, कुछ अराजक तत्व लोगों को भ्रमित करते हुए ऐसा कर रहे हैं। इसमें हस्ताक्षर ही नहीं, बल्कि बोर्ड का लेटर हेड भी फर्जी लगाया जा रहा है। इसके लिए सभी जिलों को आगाह करते हुए उन्होंने लिखा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद से प्रदेश के विद्यालयों में क्लर्क या किसी अन्य पद पर नियुक्ति नहीं की जाती है। जो नियुक्ति पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद बोर्ड उत्तर प्रदेश, लखनऊ के लेटर हेड पर मुद्रित है, वह फर्जी है।

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निर्गत फर्जी नियुक्ति पत्र पर दर्ज पत्रांक संख्या (यूपीएस 821) भी परिषद कार्यालय का पत्रांक नहीं है। उन्होंने बताया कि परिषद के फर्जी लेटर हेड पर परिषद के सचिव प्रयागराज के स्कैन किए गए हस्ताक्षर से राजीव रतन सिंह के नाम से जौनपुर में क्लर्क के पद पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किया गया है। बोर्ड सचिव का कहना है कि इसके खिलाफ एफआईआर के लिए सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी है, लेकिन पुलिस ने एफआईआर लिखने से मना कर दिया है।

बकौल शुक्ल, पुलिस का तर्क है कि मामला जौनपुर का है, इसलिए वहीं दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जब यूपी बोर्ड की शिकायत दर्ज नहीं हो रही है तो आम जनता का क्या हाल होगा। वहीं, इंस्पेक्टर भानू प्रताप का कहना है कि घटना जौनपुर की है, इसलिए वहीं दर्ज कराना चाहिए।

...और भी तो नियुक्तियां नहीं हो गईं?

बोर्ड सचिव के फर्जी हस्ताक्षर से नौकरी दिलाने में कामयाब रहा गैंग कहीं पूरे प्रदेश में तो अपना जाल नहीं फैला चुका? सचिव का पत्र ऐसा ही संकेत दे रहा है। इसका खुलासा तभी संभव है, जब जांच हो, लेकिन अभी तो पुलिस एफआईआर ही नहीं लिख रही।

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