Prayagraj : महाकुंभ मेले में खोए बच्चों को खोजेंगे फेस रिकग्निशन कैमरे, जंक्शन समेत नौ स्टेशन पर लगेंगे डिवाइस
पुलिस व खुफिया विभाग भी इन कैमरों का उपयोग कर सकेगी। पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद संदिग्धों, अपराधियों की फोटो को भी इसमें स्कैन कर रखा जाएगा। ताकि महाकुंभ के दौरान अगर वह किसी भी कैमरे में नजर आए तो उसकी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।
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इस बार महाकुंभ में रेलवे स्टेशन पर कोई भी बच्चा नहीं बिछड़ेगा। अगर बिछड़ेगा भी तो कुछ ही देर में उसे खोज लिया जाएगा। यह संभव होगा फेस रिकग्निशन कैमरे से। महाकुंभ में इस बार शहर के सभी नौ रेलवे स्टेशनों पर फेस रिकग्निशन कैमरे का इस्तेमाल होगा। ताकि, कोई बच्चा खोए तो उसे आसानी से ढूंढ़ कर स्वजन से मिलाया जा सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित इस तरह के 96 कैमरे प्रयागराज जंक्शन, फाफामऊ, प्रयागराज छिवकी, प्रयाग आदि स्टेशनों पर लगाए जाने की तैयारी है।
अगर कोई बच्चा मां-बाप या अपने सगे संबंधियों से बिछड़ता है तो उसकी फोटो दिखाने पर उसे एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) में स्कैन किया जाएगा। जैसे ही संबंधित बच्चा किसी भी कैमरे की जद में आएगा तुरंत स्क्रीन पर अलर्ट का मैसेज आएगा। यह मैसेज सीधे कंट्रोल रूम पहुंचेगा। आरपीएफ के जवान तत्काल इसकी सूचना लोकेशन पर भेजेंगे। बच्चे के नजदीक जो भी सुरक्षाकर्मी होंगे वह उस तक पहुंच जाएंगे।
पुलिस व खुफिया विभाग भी इन कैमरों का उपयोग कर सकेगी। पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद संदिग्धों, अपराधियों की फोटो को भी इसमें स्कैन कर रखा जाएगा। ताकि महाकुंभ के दौरान अगर वह किसी भी कैमरे में नजर आए तो उसकी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।
बंगलूरू में सफल रहा है एफआरएस का ट्रायल
बताया जा रहा है कि यह विशेष कैमरे मेला के कंट्रोल कमांड सेंटर, जिला प्रशासन के साथ यातायात पुलिस एवं पुलिस के सीसीटीवी कंट्रोल रूम से भी जुड़ा होगा। फिलहाल प्रयागराज जंक्शन, सूबेदारगंंज, छिवकी, नैनी, रामबाग, झूंसी, संगम, प्रयाग व फाफामऊ रेलवे स्टेशन पर फेस रिकग्निशन कैमरे यानी चेहरा पहचानने वाले कैमरा लगेंगे। बंगलूरू में इसका ट्रायल भी सफल रहा है। ऐसे में महाकुंभ के दौरान यह तकनीक काम करती नजर आएगी। इससे बच्चों को ढूंढ़ने के अलावा रेलवे स्टेशन पर आने वाले संदिग्धों की पहचान करना आसान होगा।
महाकुंभ मेले के पूर्व फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए जाएंगे। अभी 96 कैमरे के लिए स्थान चिह्नित किया जा रहा है। निश्चित ही इस तकनीकी से सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता होगी। - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, एनसीआर।