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High Court : 13 साल बाद भी महिला को रेड लाइट एरिया पहुंचाने वालों का पता नहीं, शादी के बाद हुई थी गायब

Mon, 06 May 2024 12:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 May 2024 12:27 PM IST
सार

यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ कुमार वागव की अदालत ने सुनाया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी केएन सिंह और आरोपी महिला की ओर से अधिवक्ता गोविंद लाल पांडेय, रमेश कुमार वर्मा ने अपनी दलीलें पेश कीं।

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Even after 13 years, the people who took the woman to the red light area are not known, she went missing after
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

13 साल पहले इलाहाबाद जंक्शन से वेश्यावृत्ति के लिए महिला को रेड लाइट पहुंचाने वालों को कोतवाली पुलिस अदालत में पेश नहीं कर सकी। ट्रायल कोर्ट में पेश महिला को पीड़िता ने पहचानने से इन्कार कर दिया। कहा कि एक महिला समेत जिन चार लोगों ने उसे इसमें धकेला, उन्हें वह पहचान सकती है, पर वो अदालत में हैं ही नहीं। जिला अदालत ने कई साल से वेश्यावृत्ति कराने का आरोप झेल रही महिला को बरी कर दिया।

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यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ कुमार वागव की अदालत ने सुनाया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी केएन सिंह और आरोपी महिला की ओर से अधिवक्ता गोविंद लाल पांडेय, रमेश कुमार वर्मा ने अपनी दलीलें पेश कीं। मामला प्रयागराज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के मीरगंज इलाके का है। जिसे कभी रेड लाइट एरिया के रूप में जाना जाता था। वाकया, वर्ष 2010 का है।
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मऊआइमा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने 10 मई को अपनी पत्नी के अपहरण, देह व्यापार के आरोप में दो महिलाओं और दो पुरुषों समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बताया कि महाराष्ट्र के पुणे में 25 मार्च 2010 को शादी के बाद वह पहली बार इलाहाबाद पत्नी के साथ आया था। वह पानी लेने गया था, इसी बीच स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी पत्नी गायब हो गई।

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खोजबीन के बाद एक साल बाद अचानक उसकी पत्नी उसे मीरगंज में दिखी। ग्राहक के रूप में पत्नी उसे कमरे में ले गई और आपबीती सुनाई। उसने इस दलदल से निकालने की गुहार लगाई। इसकी जानकारी पति ने पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता को मीरगंज से बरामद किया। हलांकि, अदालत में जिरह के दौरान पीड़िता के पति ने बताया कि फर्द बरामदगी थाने में तैयार हुई थी। पत्नी को पुलिस कहां से लाई, कैसे लाई? कुछ नहीं बताया गया।

पुलिस ने बताया फर्द पर हस्ताक्षर बनाने पर ही पत्नी उसे सुपुर्द की जाएगी। पत्नी की सुपुर्दगी की गरज से हस्ताक्षर किया था, उसमें क्या लिखा था नहीं पढ़ा और न पुलिस ने पढ़ कर सुनाया था। इसी तरह जिरह के दौरान पीड़िता के सामने अदालत में पेश की गई आरोपी महिला वह नहीं थी, जिसने उसको वेश्यावृत्ति के लिए खरीदा था।

पीड़िता ने कहा कि जिन दो व्यक्तियों और दो महिलाओं ने उसे देह व्यापार के दलदल में धकेला, उन्हें अदालत में पेश किया जाए तो वह उनकी तस्दीक बखूबी कर सकती है। लेकिन, अदालत में पेश की गई महिला ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने पीड़िता को प्रताड़ित करने और देह व्यापार में धकेलने की आरोपी महिला को संदेह के आधार पर बेगुनाह करार देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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