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electricity bill scam: बिजली बिल घोटाले में कार्यालय सहायक पर भी गिरी गाज, अब अब तक दो निलंबित
Thu, 09 Jun 2022 11:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 Jun 2022 11:08 PM IST
सार
बिजली बिल घोटाले की जांच में एक-एक कर मामले सामने आते जा रहे हैं। इस मामले में कार्यालय सहायक धर्मेंद्र को भी निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि कैशबुक धर्मेंद्र ही जारी करता था।
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electricity bill
- फोटो : iStock
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विस्तार
ढ़ाई करोड़ रुपये के बिजली बिल घोटाले में कार्यालय सहायक को भी निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले इस मामले कैशियर का काम देखने वाले तकनीकी सहायक को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। फिलहाल वह फरार है। उधर,एमडी के निर्देश पर इस मामले में अफसरों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। कहा जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में कई अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
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बिजली बिल घोटाले की जांच में एक-एक कर मामले सामने आते जा रहे हैं। इस मामले में कार्यालय सहायक धर्मेंद्र को भी निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि कैशबुक धर्मेंद्र ही जारी करता था। 18 जनवरी 2017 से 30 दिसबंर 2017 तक के मेजा विद्युत वितरण खंड के उपभोक्ताओं के बिजली बिल वसूलने के बाद राजस्व रिकार्ड में जमा न कराए जाने मामला पांच साल तक अफसर दबाए रहे।
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इसके पीछे कार्यालय के लिपिकों और अफसरों की सांठगांठ बताई जा रही है। इस घोटाले की बू जब सबसे पहले अधीक्षण अभियंता प्रशांत सिंह तक पहुंची, तब उन्होंने कमेटी गठित कर इस मामले की जांच शुरू कराई। लेकिन इसके बाद भी इसकी लीपापोती की जाती रही। दिसंबर 2021 में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट मई 2022 में आई तब उच्चाधिकारी हैरान रह गए। पता चला कि 2.49 करोड़ रुपये से अधिक की रकम राजस्व खाते में जमा नहीं हुई है।
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यह रकम गई कहां, इसे अब खंगाला जा रहा है। इससे पहले इस मामले में कैशियर का काम देखने वाले तकनीकी सहायक पवन तिवारी को निलंबित कर उस पर एफआईआर दर्ज कराई गई। अफसरों का कहना है कि इस घोटाले के जिम्मेदारों से रिकबरी कराई जाएगी। जांच के दौरान इस मामले में कार्यालय सहायक धर्मेंद्र को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तलाशी जा रही है।