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Prayagraj News: एसआरएन में आठ लिफ्ट खराब, मरीजों को रुला देती हैं सीढि़यां
Mon, 28 Sep 2026 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:38 AM IST
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स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में 11 में से आठ लिफ्ट बीते एक वर्ष से खराब हैं।सीढि़यों और रैंप के जरिये तीन-चार मंजिल तक चढ़ने पर मरीजों और तीमारदारों का दम फूल रहा है। खींचकर ले जाने की वजह से वार्ड बॉय मरीज के स्ट्रेचर को छूते तक नहीं हैं। तीमारदारों को खुद ही धक्का लगाकर वार्ड तक पहुंचना पड़ता है। तीमारदारों का कहना है, सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाख दावा करे, लेकिन एसआरएन में इलाज कराना दिन पर दिन मुश्किल होता जा रहा है।
यहां वर्ष 2006-2007 और 2013-2014 में लगीं इन लिफ्ट की मरम्मत का ठेका समाप्त हो चुका है। इस वजह से रिपेयरिंग नहीं हो पा रही है। 220 बेड की पांच मंजिला पीएमएसएसवाई बिल्डिंग के वार्डों तक पहुंचना सबसे मुश्किल है। यहां पांच में तीन लिफ्ट खराब हैं। रेडियोलॉजी विभाग के टेक्नीशियन मरीज का बेड साइड एक्सरे करने नहीं जाते हैं। वार्ड बॉय सीढ़ी व रैंप चढ़ने की वजह से मरीजों को ले जाने से मना कर देते हैं।
इस इमारत के प्रथम व द्वितीय तल पर चार जनरल व तीसरे तल पर दो आईसीयू वार्ड हैं। चौथी मंजिल पर ऑपरेशन थियेटर है। ग्राउंड फ्लोर पर सीटी स्कैन, एक्सरे व पैथोलॉजी की जांच होती है। वार्ड में भर्ती किसी मरीज का बार-बार ऊपर-नीचे आना जाना बेहद कठिन है। ग्राउंड फ्लोर पर ही यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूट्रिशन विभाग की ओपीडी चलती है।
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टीबी मरीजों व गर्भवतियों के लिए एक-एक सीढ़ी चढ़ना मुश्किल
1200 बेड की तीन मंजिला पुरानी बिल्डिंग का भी यही हाल है। यहां दो लिफ्ट एक-दो नहीं, कई वर्षाें से खराब हैं। वार्ड-दो के पास स्थित लिफ्ट का केबिन गल गया है। इसे पूरा बदला जाएगा। इस इमारत में प्रमुख अधीक्षक कार्यालय के अलावा तीन ऑपरेशन थियेटर, एचडीयू व आईसीयू वार्ड हैं। पहली मंजिल पर ईएनटी, महिला व टीबी रोगियों का वार्ड है। इसी मंजिल पर गायनी विभाग का ऑपरेशन थियेटर है। तीसरी मंजिल पर जनरल वार्ड हैं। ऐसे में हड्डी और टीबी के गंभीर मरीजों व गर्भवतियों के लिए एक-एक सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो जाता है।
पुराना ओपीडी ब्लाॅक, गैस्ट्रोलॉजी व ट्रॉमा सेंटर में भी लिफ्ट खराब
पुराना ओपीडी ब्लॉक की एक लिफ्ट एक साल से खराब है। इस बिल्डिंग के प्रथम तल पर ईएनटी, दंत रोग, सर्जरी ओपीडी, एआरटी सेंटर, सर्जरी आईसीयू व इमरजेंसी मेडिसिन के वार्ड हैं। तीसरी मंजिल पर टीबी चेस्ट ओपीडी, आई ओपीडी, डाॅट्स सेंटर व स्किन की ओपीडी चलती है। गैस्ट्रोलॉजी व ट्रॉमा सेंटर की भी एक-एक लिफ्ट खराब है। यहां भी टीबी और सांस के रोगियों को जान हथेली पर लेकर ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाया जाता है।
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यहां वर्ष 2006-2007 और 2013-2014 में लगीं इन लिफ्ट की मरम्मत का ठेका समाप्त हो चुका है। इस वजह से रिपेयरिंग नहीं हो पा रही है। 220 बेड की पांच मंजिला पीएमएसएसवाई बिल्डिंग के वार्डों तक पहुंचना सबसे मुश्किल है। यहां पांच में तीन लिफ्ट खराब हैं। रेडियोलॉजी विभाग के टेक्नीशियन मरीज का बेड साइड एक्सरे करने नहीं जाते हैं। वार्ड बॉय सीढ़ी व रैंप चढ़ने की वजह से मरीजों को ले जाने से मना कर देते हैं।
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इस इमारत के प्रथम व द्वितीय तल पर चार जनरल व तीसरे तल पर दो आईसीयू वार्ड हैं। चौथी मंजिल पर ऑपरेशन थियेटर है। ग्राउंड फ्लोर पर सीटी स्कैन, एक्सरे व पैथोलॉजी की जांच होती है। वार्ड में भर्ती किसी मरीज का बार-बार ऊपर-नीचे आना जाना बेहद कठिन है। ग्राउंड फ्लोर पर ही यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूट्रिशन विभाग की ओपीडी चलती है।
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टीबी मरीजों व गर्भवतियों के लिए एक-एक सीढ़ी चढ़ना मुश्किल
1200 बेड की तीन मंजिला पुरानी बिल्डिंग का भी यही हाल है। यहां दो लिफ्ट एक-दो नहीं, कई वर्षाें से खराब हैं। वार्ड-दो के पास स्थित लिफ्ट का केबिन गल गया है। इसे पूरा बदला जाएगा। इस इमारत में प्रमुख अधीक्षक कार्यालय के अलावा तीन ऑपरेशन थियेटर, एचडीयू व आईसीयू वार्ड हैं। पहली मंजिल पर ईएनटी, महिला व टीबी रोगियों का वार्ड है। इसी मंजिल पर गायनी विभाग का ऑपरेशन थियेटर है। तीसरी मंजिल पर जनरल वार्ड हैं। ऐसे में हड्डी और टीबी के गंभीर मरीजों व गर्भवतियों के लिए एक-एक सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो जाता है।
पुराना ओपीडी ब्लाॅक, गैस्ट्रोलॉजी व ट्रॉमा सेंटर में भी लिफ्ट खराब
पुराना ओपीडी ब्लॉक की एक लिफ्ट एक साल से खराब है। इस बिल्डिंग के प्रथम तल पर ईएनटी, दंत रोग, सर्जरी ओपीडी, एआरटी सेंटर, सर्जरी आईसीयू व इमरजेंसी मेडिसिन के वार्ड हैं। तीसरी मंजिल पर टीबी चेस्ट ओपीडी, आई ओपीडी, डाॅट्स सेंटर व स्किन की ओपीडी चलती है। गैस्ट्रोलॉजी व ट्रॉमा सेंटर की भी एक-एक लिफ्ट खराब है। यहां भी टीबी और सांस के रोगियों को जान हथेली पर लेकर ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाया जाता है।