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नए साल में दवा के बढे़ंगे दाम, ढीली होगी जेब, कई दवाओं के दोगुने तक बढ़ सकते हैं दाम

Fri, 01 Jan 2021 02:11 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 01 Jan 2021 02:11 AM IST
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Drug prices will increase in the new year, pockets will be loose, prices of many medicines can increase up to double
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऑफ सीजन में दवाओं की आपूर्ति बाधित है। दवाओं का कच्चा माल महंगा हो गया है। गोलियों को पैक करने वाले पीवीसी के दाम 80 से 100 फीसदी बढ़ गए हैं। पहले के आर्डर पर फार्मा कंपनियां दवाओं की आपूर्ति में टाल मटोल कर रही हैं। साफ है सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो नए साल में जरूरी दवाओं की किल्लत तो होगी ही उनके दाम भी बढ़ेंगे। सामान्य बुखार, सर्दी, दर्द की ही नहीं जीवन रक्षक दवाएं भी महंगी हो जाएंगी।
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पैरासीटामॉल, निमुस्लाइड, एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं के दाम हो सकते हैं डेढ़ से दोगुना

दवा निर्माताओं, एमआर और थोक विक्रेताओं के संवाद में साफ हो गया है कि दवाओं का कच्चा माल महंगा हो गया है। सबसे अधिक मार पैरासीटामॉल और निमुस्लाइड पर पड़ी है। इन दवाओं के पाउडर 150 से 700 रुपये अधिक हो गए हैं। यही नहीं सामान्य तौर पर सुरक्षित माने जाने वाली एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन, ट्रेटासाइक्लिन, क्लोरोफिनिकॉल जैसी दवाएं डेढ़ से दोगुना महंगी हो जाएंगी।
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कोरोना काल का चीनी इफेक्ट अब पड़ने लगा है भारी

कोविड संक्रमण काल में देश में दवाओं का 90 फीसदी कच्चा माल चाइना से आता था। चीन से कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हुई तो अन्य देशों पर निर्भरता बढ़ गई। दवा संघ के प्रतिनिधियों के मुताबिक दवाओं के साल्ट ही नहीं पीवीसी, एल्युमिनियम और गत्ते के दाम भी अचानक बढ़ गए हैं। इसका प्रभाव दवा उत्पादन पर पड़ रहा है। कोरोना काल का चाइना इफेक्ट अब दवा कारोबार पर भारी पड़ने लगा है। इसका असर सामान्य ही नहीं जीवन रक्षक दवाएं महंगी हो जाएंगी।
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Drug prices will increase in the new year, pockets will be loose, prices of many medicines can increase up to double
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

डीपीसीयू की अनुमति से लागू होती है मूल्य वृद्धि

दवा कारोबारियों के मुताबिक दवा निर्माता छोटी कंपनियां तो लागत के आधार पर दाम तुरंत बढ़ा देती हैं, लेकिन पेटेंट वाली फार्मा कंपनियों को दवाओं के मूल्य नियंत्रण वाली संस्था डीपीसीयू से इसके बारे में औपचारिकताएं पूरी कर अनुमति लेनी पड़ती है। बताते हैं यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दवा कंपनियों की ओर से नए साल में जारी बैच नंबर पर बढ़े दाम अंकित होंगे। जेनरिक दवाओं के निर्माता इस नियम से अछूते है, जिससे दवाएं महंगी हो जाएंगी।
अभी है पर्याप्त स्टाक, नहीं हुई आपूर्ति तो होगी दवाओं की किल्लत

दवा बाजार का यह ऑफ सीजन है। कोरोना काल में कुछ दवाओं को छोड़कर आपूर्ति सामान्य और स्टाक भरपूर रहा। अभी बाजार में पर्याप्त स्टाक है। दुकानदारों का कहना है कि जिस तरह कंपनियां पहले के आर्डर पर दवाओं की आपूर्ति नहीं कर रही हैं, उससे साफ है कि दवाओं की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो जरूरी दवाओं की किल्लत हो सकती है। फिलहाल दवा कंपनियां पुराने आर्डर के मुताबिक दवाओं की आपूर्ति पर आनाकानी कर रही हैं।
 
  • बाजार में सभी तरह की दवाओं का पर्याप्त स्टाक है। कंपनियां पुराने आर्डर के मुताबिक दवाओं की आपूर्ति नहीं कर रही हैं। जिस तरह की सूचनाएं हैं, उससे साफ है कि दवाओं का नया स्टाक बढ़े मूल्य के आधार पर ही आएगा। अभी दवाओं की बिक्री कम और दाम स्थिर हैं। किसी भी कीमत पर दवाओं की बिक्री प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। -- अनिल दुबे, अध्यक्ष इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
 
  • जेनरिक दवा निर्माता कंपनियों ने कच्चा माल महंगा होने को आधार बनाकर बढ़े दामों पर दवाओं के आर्डर लिए हैं। नामी फार्मा कंपनियों ने आपूर्ति कम कर दी है। यह दवाओं का ऑफ सीजन है, कुछ दवाओं को छोड़कर बिक्री कमजोर है। स्टाक है पर ग्राहक नहीं हैं। संकेत मिले हैं कि जरूरी दवाओं की आपूर्ति बढ़ी दर पर की जाएगी। -परमजीत सिंह, महामंत्री इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
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