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दान किए 15.60 करोड़ और खाते में पहुंचे 11.46 करोड़
Fri, 08 Feb 2019 01:27 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 08 Feb 2019 01:27 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पुरा छात्र ईश्वर टोपा की ओर से इविवि को दान में दी गई करोड़ों की रकम को लेकर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्र ने बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया है कि इविवि प्रशासन ने तीन करोड़ 84 लाख रुपये का गबन किया है। हालांकि इविवि प्रशासन ने आरोप को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि जो भी रकम मिली थी, वह बैंक में जमा कर दी गई है।
फ्लोरिडा में रहने वाले ईश्वर टोपा ने इविवि को अपनी संपत्ति का एक हिस्सा दान कर दिया था, जिसका मूल्य 2228312.27 डॉलर या 15 करोड़ 60 रुपये था। इसमें तकरीबन 21 लाख 94 हजार रुपये कोर्ट फीस के कट गए। रोहित ने एमएचआरडी की ओर से मई 2017 को जारी एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इविवि प्रशासन ने बैंक में 11 करोड़ 46 लाख रुपये ही जमा किए। रोहित का सवाल है कि आखिर तीन करोड़ 84 लाख रुपये कहां गए। उनका आरोप है कि इस धनराशि का कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू, तत्कालीन रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला एवं तत्कालीन प्रधान सचिव अनुपम पांडेय ने मिलकर यह घपला किया।
रोहित ने नवंबर 2017 में इविवि में आई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष गौतम देशी राजू की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय अपना अंतिम बजट इस्टीमेट बनाता है तो केवल यूजीसी द्वारा दिए गए पैसे का उल्लेख करता है, जबकि दान, ब्याज और अन्य स्नोतों से प्राप्त धन का कोई हिसाब नहीं देता। उधर, मामले में इविवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय को दान के रूप में मिली 1646038.92 डॉलर यानी 11.46 करोड़ रुपये की धनराशि विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा प्रतिवेदन में दर्शायी गई है। जो धनराशि आई, उसकी सूचना मंत्रालय को सीधे यूएस दूतावास से दी गई। धनराशि पंजाब नेशनल बैंक की कर्नलगंज शाखा में जमा है और ब्याज भी नियमित रूप से जमा हो रहा है। रोहित मिश्र के सभी आरोप मनगढ़ंत है। यह विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश है।
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फ्लोरिडा में रहने वाले ईश्वर टोपा ने इविवि को अपनी संपत्ति का एक हिस्सा दान कर दिया था, जिसका मूल्य 2228312.27 डॉलर या 15 करोड़ 60 रुपये था। इसमें तकरीबन 21 लाख 94 हजार रुपये कोर्ट फीस के कट गए। रोहित ने एमएचआरडी की ओर से मई 2017 को जारी एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इविवि प्रशासन ने बैंक में 11 करोड़ 46 लाख रुपये ही जमा किए। रोहित का सवाल है कि आखिर तीन करोड़ 84 लाख रुपये कहां गए। उनका आरोप है कि इस धनराशि का कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू, तत्कालीन रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला एवं तत्कालीन प्रधान सचिव अनुपम पांडेय ने मिलकर यह घपला किया।
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रोहित ने नवंबर 2017 में इविवि में आई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष गौतम देशी राजू की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय अपना अंतिम बजट इस्टीमेट बनाता है तो केवल यूजीसी द्वारा दिए गए पैसे का उल्लेख करता है, जबकि दान, ब्याज और अन्य स्नोतों से प्राप्त धन का कोई हिसाब नहीं देता। उधर, मामले में इविवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय को दान के रूप में मिली 1646038.92 डॉलर यानी 11.46 करोड़ रुपये की धनराशि विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा प्रतिवेदन में दर्शायी गई है। जो धनराशि आई, उसकी सूचना मंत्रालय को सीधे यूएस दूतावास से दी गई। धनराशि पंजाब नेशनल बैंक की कर्नलगंज शाखा में जमा है और ब्याज भी नियमित रूप से जमा हो रहा है। रोहित मिश्र के सभी आरोप मनगढ़ंत है। यह विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश है।
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